रायपुर द​क्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी रामसुंदर दास तय, क्या अपने गुरु के सामने टिक पायेंगे पूर्व मंत्री? देखें कांग्रेस के बाकी नाम….।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में इस समय भाजपा की चुनावी रणनीति अच्छे – अच्छों की समझ से परे है, जहाँ पार्टी ने वहीँ जनता को बोर करने वाले चेहरे उतार दिये है और कांग्रेस ने उनके सामने मजबूत चेहरे उतारे है, उत्तर में कमजोर प्रत्याशी उतारा है भाजपा ने, पश्चिम में हारे हुये चेहरे को उतारा है, आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा का ध्यान ज्यादा है, ये सब समझ से परे है, लेकिन इन मुद्दों को समझने वाले यही मान रहे है, कि भाजपा इस बार भी सत्ता से बाहर ही रहेगी।

रायपुर शहर की विधानसभा सीट दक्षिण से बृजमोहन अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी घोषित किये जा चुके हैं। वहीँ कांग्रेस महंत रामसुंदर दास को यहां से प्रत्याशी बनाना तय है। ऐसा हुआ तो गुरु के सामने पूर्व मंत्री चुनाव लड़ रहे होंगे। दोनों के बीच रिश्ता मधुर है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। मगर सियासी रण में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना दक्षिण विधानसभा की सीट के सियासी हालातों को दिलचस्प बना रहा है, दक्षिण विधानसभा में वोटरों का गुणाभाग इस बार अव्यवस्थित रहने वाला है, इसलिये पूर्व मंत्री की जीत पर खतरा मंडरा रहा है।

रायपुर के भाटागांव स्थित रावणभाटा मैदान में एक कार्यक्रम के दौरान महंत रामसुंदर दास और बृजमोहन अग्रवाल एक साथ दिखाई दिए थे। यहां दशहरा उत्सव के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम रखा गया था। इससे पहले भी कई कार्यक्रमों में दोनों एक साथ दिखते रहे हैं, मगर इस बार चर्चाएं कुछ अलग हैं।

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दशहरा मैदान में साथ खड़े दिख रहे महंत रामसुंदर और बृजमोहन अग्रवाल अगर सियासी रण में उतरे तो एक दूसरे के खिलाफ होंगे। महंत रामसुंदर इससे पहले भी कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इस वक्त कांग्रेस सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। बृजमोहन अग्रवाल 35 सालों से दक्षिण के विधायक हैं। पिछली बार प्रदेश से भाजपा को हार सामना करना पड़ा था। लेकिन रायपुर में जीत हासिल करने वाले इकलौते नेता बृजमोहन अग्रवाल रहे, पिछली बार भी इनका जीतना काफी मुश्किल था पर इन्होने जोड़तोड़ लगाकर अपनी सीट निकाल ही ली।

महाभारत से जुड़ी चर्चाएं कर रहे समर्थक :

रायपुर के दक्षिण विधानसभा सीट को लेकर जो हालात बन रहे हैं, उसे लेकर लोगों के बीच और सोशल मीडिया पर चर्चा है। महाभारत से जोड़कर बातें की जा रही हैं। महंत राम सुंदर को गुरु द्रोण बताया जा रहा है, बृजमोहन अग्रवाल को कृष्ण।

दोनों एक दूसरे पर आरोप नहीं लगाएंगे :

राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर बृजमोहन अग्रवाल के सामने रामसुंदर के बाद बृजमोहन का सियासी तेवर वैसा नहीं रहेगा जैसा अन्य प्रत्याशियों को लेकर होता है। महंत भी बृजमोहन के कामों को पूर्व में सराहते रहे हैं। दोनों ही एक दूसरे पर सियासी आरोप लगाने से बचेंगे। बृजमोहन राजिम कुंभ लेकर, प्रदेश के मठ मंदिरों के लिए योजनाएं लाने का काम मंत्री रहते हुए कर चुके हैं। तब रामसुंदर दास से भी सलाह लिया करते थे।

आज भी बृजमोहन के पारिवारिक धार्मिक कार्यक्रमों में महंत रामसुंदर दास का आना-जाना है। यहां तक कि पिछले साल चुनाव के दौरान जब बृजमोहन दूधाधारी मठ में भगवान राम के दर्शन करने गए तो महंत से आर्शीवाद लिया था। वो अक्सर आदर भाव से महंत रामसुंदर के पैर छूते दिखते हैं, अब इनके सामने बृजमोहन अग्रवाल की रणनीति क्या होगी इसको लेकर कौतुहल हो सकता है।

महंत रामसुंदर का सियासी सफर :

रायपुर के सबसे प्रचीन दुधाधारी मठ के प्रमुख महंत रामसुंदर दास इस वक्त छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं। साल 2001-2003 में सरकार के संस्कृत बोर्ड के पहले अध्यक्ष रहे। सदस्य रहे छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के। साल 2003 में पहली बार जैजैपुर से विधायक बने, दूसरी बार 2008 में भी विधायक बने।

बृजमोहन के सफर पर एक नजर :

बृजमोहन अग्रवाल साल 1990 में पहली बार विधायक बने। उस वक्त के दिग्गज विद्याचरण शुक्ल को हरा चुके हैं। तब से आज तक बृजमोहन विधायक का चुनाव जीतते रहे हैं। प्रदेश सरकार में गृह, शिक्षा, संस्कृति, कृषि जैसे विभागों के मंत्री रह चुके हैं। ऐसे ही रमेश बैस भी 7 बार के सांसद रह चुके है, इनमें इनके काम से ज्यादा यहाँ के वोटरों का भाजपा के प्रति समर्पण है, राजधानी में हिन्दू बहुल वोट है, जो इतने लम्बे समय से भाजपा के समर्थक रहे है, इसी कारण ये दोनों लगातार यहाँ से बढ़त बनाये हुये है।