कांग्रेस-भाजपा के नाराज दावेदारों ने पर्चा भरा, अपनी ही पार्टी के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव, अजीत कुकरेजा कांग्रेस और सावित्री जगत भाजपा के लिये खड़ी करेंगे मुसीबत, ओमेश बिसेन भी मैदान में।

रायपुर : जहाँ निर्दलीय प्रत्याशी जातिगत आधारित दोनों पार्टियों के लिये मुसीबत खड़ी कर रहे है, वहीँ कांग्रेस-भाजपा में टिकट नहीं मिलने पर नाराज दावेदारों ने बगावत के सुर तेज कर दिए हैं। टिकट नहीं मिलने पर दावेदारों ने अपने ही प्रत्याशी के खिलाफ पर्चा भरकर मोर्चा खोल दिया है। राजधानी सहित अंतागढ़ से लेकर कसडोल, पामगढ़, मनेंद्रगढ़, धमतरी आदि विधानसभा सीटों पर ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। वहीँ गौसेवक ओमेश बिसेन ने भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है, जो दक्षिण विधानसभा से बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।

रायपुर में भी कुछ दावेदारों ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र भर दिया है। बगावती सुर पार्टियों के लिए भी सिरदर्द बनते जा रहा है। जहाँ भाजपा की रणनिति समझ से परे है, वहीँ कांग्रेस हार-जीत से परे रहकर कार्य कर रही है, उसे अपनी जीत पर पूरा भरोसा है, वहीँ शुक्रवार को कांग्रेस नेता गोरेलाल बर्मन पार्टी से अलग होकर जकांछ में शामिल हो गए। दूसरे चरण के लिए 30 अक्टूबर तक नामांकन पत्र भरा जाना है। ऐसे में रोजाना नया उलटफेर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में और नेताओं के बागी होने के संकेत मिले हैं।

प्रत्याशी को रहता से पार्टी से निलंबन का डर , लेकिन विरोधी पार्टी हाथों हाथ ले लेती है :

जहाँ अजीत कुकरेजा को पूरे सिन्धी समाज सहित समर्थकों और क्षेत्र के वोटरों का भरपूर समर्थन मिल रहा है, वहीँ वो निलंबन के डर से निर्णय नहीं ले पा रहे है, जबकि ऐसे प्रत्याशियों पर विरोधी पार्टी अपने साथ जोड़ने से परहेज नहीं करती, जबकि निर्दलीय पार्षद के आधार पर अधिकतर नेता चुनाव जीत जाते है फिर पार्टी उनका निलंबन भी रद्द कर ही देती है। कुल मिलकर अजित कुकरेजा सभी तरफ से पाने वाले नेता है, उनका कोई नुकसान नहीं है।

कसडोल में निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा :

कसडोल विधानसभा से टिकट न मिलने पर साहू समाज के गोरेलाल साहू ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। कसडोल विधानसभा से कांग्रेस ने संदीप साहू को प्रत्याशी बनाया है। वर्तमान में जिला पंचायत सभापति गोरेलाल साहू ने नामांकन पत्र खरीद लिया है। यहां सामाजिक वोट बंटने की आशंका जताई जा रही है। मीडिया से चर्चा में गोरेलाल ने कहा कि संदीप साहू स्थानीय नहीं है और कसडोल विकासखंड के भी नहीं है, जबकि कसडोल और समाज के लोग हमेशा से ही स्थानीय कसडोल विधानसभा क्षेत्र के ही निवासी को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। पिछले बार भी हमने इसी मांग पर संघर्ष किया, तब शकुंतला साहू को टिकट मिला और वह विजयी हुई थी। यहाँ मुद्दा क्षेत्रिय आधार पर बताया जा रहा है।

कांग्रेसी नेता गोरेलाल जकांछ में शामिल, पामगढ़ से लड़ेंगे चुनाव :

कांग्रेस नेता गोरेलाल बर्मन कांग्रेस से त्यागपत्र देकर जोगी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने जकांछ अध्यक्ष अमित जोगी के सामने पार्टी की सदस्यता ली। उन्हें पामगढ़ से जकांछ प्रत्याशी बनाया गया है। पामगढ़ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी गोरेलाल बर्मन को बसपा की इंदु बंजारी ने 3,061 वोटों से हराया था। कांग्रेस से दावेदारी के बाद भी टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर कर दी है। पिछले दिनों उन्होंने अपने समर्थकों के साथ दिल्ली एवं रायपुर में शक्ति प्रदर्शन भी किया था।

रायपुर उत्तर से कुकरेजा व सावित्री भी नाराज :

रायपुर उत्तर से कांग्रेस ने कुलदीप जुनेजा को टिकट दिया है। यहां से कांग्रेसी नेता व पार्षद अजीत कुकरेजा ने नामांकन पत्र खरीद लिया है। बता दें कि कांग्रेस नेता कुकरेजा पिछले तीन बार से यहां पार्षद हैं। टिकट के लिए उन्होंने बड़ी लॉबिंग की थी। इधर, भाजपा ने रायपुर उत्तर से पुरंदर मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन इसी क्षेत्र से भाजपा महिला नेता सावित्री जगत ने पर्चा भर दिया है। हालांकि सीट से अंतिम मुहर पार्टी के बी-फार्म देने के बाद ही लगेगी। उत्तर विधानसभा में राजनैतिक तौर पर कुछ खास नहीं है, लेकिन फिर भी यह हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी है।

धमतरी-मनेंद्रगढ़ में भी बदला सा माहौल :

धमतरी में पूर्व विधायक व कांग्रेसी नेता गुरुमुख सिंह होरा ने पर्चा भरने के लिए नामांकन खरीद लिया है। मनेंद्रगढ़ विधायक डा. विनय जायसवाल भी टिकट कटने के बाद बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के श्याम बिहारी को चार हजार से अधिक वोटों से हराया था।

ओमेश बिसेन कहाँ से भरेंगे नामांकन कितने इन्हें जानते है, कितना प्रभावित होंगे बृजमोहन :

गौसेवक ओमेश बिसेन छत्तीसगढ़ के नामी गौसेवक है, जो लगातार गौ तस्करों को पकड़ने का काम करते है, इनके संपर्क भी कम नहीं है, ये बृजमोहन अग्रवाल के धुर विरोधी रहे है, चुनाव दर चुनाव बृजमोहन अग्रवाल के वोट अंतर में कमी देखने को मिली है और इस बार राजनैतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि बृजमोहन अग्रवाल का यह अंतिम चुनाव हो सकता है, इसमें भी ओमेश बिसेन इनके अधिकतर वोट काटने की क्षमता रखते है। ये भी दक्षिण विधानसभा से नामांकन भरने की तैयारी कर रहे है।