कौशाम्बी (उ.प्र.) : जिले में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है, जहाँ मृतक ने अपने ही मृत्यु के प्रमाण पत्र के लिये आवेदन किया है, गांव में जमीन कब्जे को लेकर मृतक के दो-दो मृत्य प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। इन प्रमाण पत्रों के जरिए मृतक की तीन पत्नियों के बच्चों के बीच भूमि कब्जे को लेकर विवाद है। प्रमाण पत्रों में मृत्यु के वर्ष में अंतर है और एक पत्र में तो मृतक ही सर्टिफिकेट का आवेदक है। इसके अलावा राशन कार्ड और खाद्यान्न के वितरण में भी अंतर है। पुलिस में शिकायत पत्र दिया गया।
खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश के कौशांबी की सिराथू तहसील क्षेत्र के एक गांव में जमीन पर कब्जे को लेकर मृतक के दो-दो मृत्य प्रमाणपत्र जारी किए गये है। एक प्रमाण पत्र में तो मृतक खुद ही सर्टिफिकेट का आवेदक है। इसमें मृत्यु का वर्ष 1990 है, जबकि दूसरे प्रमाण पत्र में मृतक का मृत्यु वर्ष 1992 दर्शाया गया है। इतना ही नहीं मृतक के जारी राशन कार्ड में साल 1992 में खाद्यान्न लाभार्थी के रूप में 2 किलो चीनी का उठाना भी दर्शाया गया है। इन्हीं प्रमाणपत्रों के जरिए मृतक की तीन पत्नियों के बच्चों के बीच भूमि कब्जे को लेकर असली वारिसाना हक को लेकर उत्पन्न विवाद दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। इनके बीच का विवाद अब काफी बढ़ चूका है।
पुलिस अधीक्षक कौशांबी बृजेश कुमार श्रीवास्तव को दिए गए शिकायती पत्र में ऐमन पुत्री कलीमउद्दीन निवासी रूप नारायणपुर सैलावी ने बताया कि उसका पड़ोसी वसीरउद्दीन, नसीरउद्दीन, महमूदा बेगम, तैमूर ने कूटरचित मृत्यु प्रमाणपत्र मेरे नाना आलेहसन का तैयार कर लिया, जिसका आवेदन संख्या 1817000080010483 है। इसमें मृत्यु का दिनांक 15.10.1990 दर्शाया गया है। खास बात तो यह है कि आवेदन विवरण में मृतक आले हसन स्वयं ही आवेदक है। इसी को लेकर क्षेत्र यह घटना गाँव में कौतुहल का विषय बन गई है।
आले हसन के नाम से 30 जून1992 को दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इतना ही नहीं राशन कार्ड के खाद्यान्न वितरण के क्रम में 1992 में आले हसन के नाम से 2 किलो चीनी भी वितरित दर्शाई गई है। उधर खंड विकास कार्यालय से जारी हुए परिवार रजिस्टर में आले हसन के पत्नी के तौर पर जोहरा बीबी और उसके बच्चों सलमा बीबी, आसमा बीबी, गुलनूर बीबी और महमूदा बेगम दर्ज है। बहरहाल आले हसन के असली वारिस साबित करने की दौड़ में बनवाए गए फर्जी प्रमाणपत्र और भूमि कब्जे का केस दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। इसमें ब्लाक और तहसीलकर्मियों की बड़ी भूमिका है जो बगैर जांच-पड़ताल फर्जी पर फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने से कोई गुरेज नही करता है। इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही है।