जय हिन्द लिखने पर उत्तर पुस्तिका को किया अमान्य, परीक्षार्थी महिला को अब कोर्ट ने दी राहत।

चेन्नई (तमिलनाडु) : तमिलनाडु लोक सेवा आयोग ने एक महिला की उत्तर पुस्तिका को अमान्य कर दिया था, क्योंकि उन्होंने पेपर में निबंध के अंत में ‘जयहिंद, आइए प्रकृति के साथ एकजुट हों‘’ लिखा था। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने परीक्षा में ‘जयहिंद‘’ लिखने वाली महिला को राहत दे दी है। जस्टिस बट्टू देवानंद ने कहा, उत्तर पुस्तिका को केवल इसलिए अमान्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि परीक्षार्थी ने पेपर के अंत में ‘जयहिंद‘ लिखा था। उन्होंने कहा, इसका अर्थ भारत की जीत है और यह आमतौर पर बोला जाने वाला नारा है, चाहे वह स्कूल की प्रार्थना में बोला जाए या फिर किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के भाषण में हो। इसको लेकर महिला की उत्तर पुस्तिका अमान्य नहीं किया जा सकता।

इस विषय पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, “चिंतन और आत्म खोज के ऐसे क्षण में, कुछ युवाओं के लिए, किसी निबंध या भाषण को विषय के सार को सारांशित करते हुए किसी ‘जय हिंद’ जैसे देशभक्ति नारे के साथ समाप्त करना अभिव्यक्ति का एक स्वाभाविक तरीका है। इस मामले में किसी कदाचार के प्रयास के किसी मौन संकेत के बजाय दिए गए विषय पर निबंध की एक स्वाभाविक पहचान प्रतीत होती है”।

कोर्ट ने राय दी कि उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिका को केवल इसलिए अमान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने अपने पेपर के अंत में “जय हिंद” लिखा था, न्यायाधीश ने कहा कि इसका मतलब “भारत की जीत” था और यह आम तौर पर बोला जाने वाला नारा है, जो अक्सर स्कूली बच्चों की प्रार्थनाओं का समापन या प्रतिष्ठित व्यक्तियों का भाषण के अंत में बोला जाता है। इस मामले को लेकर लोगों ने कहा क्या भारत देश का नागरिक जय हिन्द, भारत माता की जय नहीं बोल सकता?