तकनीक : अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ तो हर कोई हैरान था। उस वीडियो को देखकर कोई भी यकीन नहीं करेगा कि वो एक फेक वीडियो है। रश्मिका इसका शिकार हुई है, मिडिया के हिसाब से ये पहली शिकार है, जबकि इसी बीच इनके पहले भी तकनीक आने के तुरंत बाद कई सेलिब्रेटी और आम लोग इसके शिकार हो चुके है।
जहाँ सोशल मिडिया में लोग अपनी DP के जरिये लोग पहचान बनाते है, वहीँ साईबर अपराधी उनके फोटो के दुरुपयोग से जहां अनुचित कार्यों को अंजाम देते रहे है, जिनमें पैसे की धोखाधड़ी और महिलाओं के अश्लील चित्र एडिट करके फेक आईडी बदनाम किया जाता रहा है। अब उससे भी खतरनाक है ये एआई तकनीक जिससे व्यक्ति के फोटो लेकर बिलकुल असली जैसी विडियो बनाकर वायरल किया जा सकता है, जब तक पीड़ित सफाई दे तब तक उसका मान-सम्मान सब ख़राब हो चूका होगा। इस तकनीक से साईबर क्राइम की दुनिया में अब किसी का भी हंसता-बोलता चेहरा लगाकर नकली वीडियो बनाना आसान हो गया है। फिल्म अभिनेत्रियों के इस तरह के डीपफेक वीडियो सामने आने के बाद इस तकनीक को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के दौर में इस तकनीक का इस्तेमाल और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। अंदेशा है कि इस तकनीक से किसी नेता का अश्लील या विवादित बयान देते वीडियो तैयार कर इसे वायरल किया जा सकता है। इससे कितना बवाल हो सकता है, अंदाजा लगाना मुश्किल है।
डीप फेक का पता कैसे लगायें :
डीप फेक वीडियो असली है या नकली, इसकी जांच करते समय चेहरे पर बारीकी से ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हाई-एंड डीपफेक हेरफेर में चेहरे का अधिक परिवर्तन होता है। चेहरे के जिन हिस्सों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है वे हैं गाल और माथा। क्या त्वचा बहुत चिकनी या बहुत झुर्रीदार दिखाई देती है। क्या त्वचा की उम्र बालों और आंखों की उम्र के समान है। डीप फेक मूंछें, साइड बर्न या दाढ़ी हटा या लगा सकते हैं, लेकिन वे अक्सर चेहरे के बालों के बदलाव को पूरी तरह से प्राकृतिक बनाने में विफल होते हैं। चेहरे के मस्सों के मामले में भी यही स्थिति है, जो अक्सर डीप फेक में यूजर्स को नेचुरल या रियल नहीं दिखते हैं। थोड़ा सा ध्यान देने पर यहसमझ में आ जाता है।
तकनीक का दुरुपयोग है डीप फेक वीडियो
इंटरनेट की दुनिया में ऑनलाइन मौजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म एवं इंस्ट्रूमेंट की मदद से फोटो एवं वीडियो को मिलाकर डीप फेक वीडियो बनाए जा रहे हैं। डीप फेक टेक्नोलॉजी को फोटो स्वेपिंग भी कहते हैं। इसकी मदद से किसी अन्य व्यक्ति के वीडियो में वांछित व्यक्ति का फोटो या वीडियो इंपोज कर सकते हैं। इस प्रकार रनिंग वीडियो में असली की बजाय बदला हुआ व्यक्ति हंसते-खेलते और बोलते नजर आता है। तकनीक का यह दुरुपयोग चिंता का विषय है। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
यह गंभीर अपराध, हो सकती है जेल :
विशेषज्ञों की राय में डीप फेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और बदनाम करने के लिए किया जा सकता है। यह एक गंभीर किस्म का अपराध है। अनजान बनकर कभी भी कोई भी इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करें अन्यथा जेल जाना तय है। व्यक्तियों को गलत तरीके से चित्रित करने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए उपयोग की जाने वाली डीपफेक छवियों पर आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का दावा किया जा सकता है। मानहानिकारक डीपफेक सामग्री बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की जा सकती है, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से कारावास और जुर्माना हो सकता है।