2026 के बाद शुरू हो जायेगा धरती से इंसानों का खात्मा? इतने सालों में बदलने वाली है दुनिया।

देश/दुनिया : आंकड़ों की मानें तो 2026 के बाद से दुनियाभर की जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार कम होनी शुरू हो जाएगी। यानी दुनियाभर का टीएफआर 2027 से 2.0 और फिर उससे कम होने लगेगा। तेजी से बढ़ती आबादी अब तक कई देशों के लिए चिंता का सबब बना हुआ था। हालांकि अब आंकड़े बताते हैं कि आबादी बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई है। आने वाले कुछ सालों में यह रफ्तार एकदम थम जाएगी और इसके बाद आबादी घटनी शुरू हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक आने वाले 300 सालों में दुनियाभर की आबादी एक चौथाई तक कम हो जाएगी। यानी जो अभी 8 अरब है वह घटकर दो अरब रह जाएगी। ऐसे में जब जनसंख्या कम होगी तो अर्थ व्यवस्था भी सिकुड़ेगी। दुनियाभर को ये आंकड़े टेंशन दे रहे हैं। दुनिया भर के हालात लगातार बदल रहे है।

जानकारों का कहना है कि 2050 तक दुनिया की आबादी पीक पर होगी। यह 10 अरब के आसपास हो सकती है, टेक्सास यूनिवर्सिटी के पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर के डीन का कहना है कि आने वाली पीढ़ियां घटती हुई जनसंख्या देखेंगी। वहीं जानकारों का कहना है कि अभी दुनियाभर की टोटल फर्टिलिटी रिप्लेसमेंट (TFR) 2.1 है जो कि 2017 में घटकर 2.0 हो जाएगा। इसका मतलब है कि माता-पिता पर बच्चों की संख्या औसतन दो ही रह जाएगी। अभी यह थोड़ी ज्यादा है। धीरे – धीरे इसमें कमी आना शुरू जायेगी।

इंसानों के अस्तित्व पर खतरा?

बता दें कि बहुत सारी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का टीएफआर पहले ही 2.0 से नीचे आ चुका है। भारत का ही टीएफआर 1.8 है। इसके हिसाब से ही देशों में बुजुर्गो की संख्या भी बढ़ने लगेगी, जो कि अभी लगातार बढ़ रही है। भारत की औसत आयु इस समय 28 साल है। ऐसे में भारत में युवाओं की आबादी ज्यादा है लेकिन 2048 तक यह बढ़कर 40 साल होने वाली है। इस हिसाब से दुनियाभर में बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। जो इंसानों की अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी भी हो सकता है। चीन में युवाओं की औसत काफी कम हो चुकी है, और अब उसकी आबादी भी भारत से पिछड़ चुकी है।

अहम वर्ष होगा 2026 :

फिलहाल दुनियाभर का टीएफआर 2.1 है। 2026 में यह घटकर 2.0 हो जायेगा। वहीं 2081 में यह 1.4 हो सकता है। इस हिसाब से देखें तो अगले 300 सालों में दुनियाभर की आबादी सिर्फ 2 अरब रह जाएगी। 2026 एक लैंडमार्क इयर की तरह है। कई बड़े देश पहले से ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे हैं। 5 करोड़ की जनसंख्या से ज्यादा वाले 29 देशों में टीएफआर 2.1 से नीचे आ गया है। भारत, चीन और अमेरिका को जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा आंका जाता है। इनमें रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम है। बांग्लादेश और विएतनाम के टीएफआर 1.7, फ्रांस का 1.5, कोलंबिया, ईरान, यूएस और ब्राजील का 1.4, इटली का 1.0 है।

उपरोक्त बातें वैश्विक जानकारों के अनुसार है, लेकिन साथ में हमने पहले भी कई बार बताया है, भविष्य मालिका और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के बारे ये सब लगभग इसी समय के हिसाब से बैठ रही है। संसार विनाश की ओर है, अकाल मृत्यु, दुनिया में फैलती अराजकता, तृतीय विश्युद्ध का मंडराता खतरा और ग्लोबल वार्मिंग ये सब कहीं ना कही इसी तरफ ध्यान आकर्षित कर रहे है। अभी हाल ही में दुनिया कोरोना से जूझकर निकली है, और दूसरी तरफ चीन में नई बीमारी का आगाज हो रहा है।