कब लगती है शनि की साढ़े साती, क्या करना चाहिये शनि दशा वाले व्यक्ति को जाने इस खबर में….।

धर्म/ज्योतिष : शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है, जब किसी व्यक्ति की इच्छा पूरी नहीं होती तो शनि देव की आराधना से उसे जल्द ही न्याय मिल जाता है। शनि देव अपने गोचर के दौरान हर राशि को प्रभावित करते हैं। कर्मफलदाता एक राशि में ढाई साल तक रहते हैं। छायापुत्र की विशेष स्थिति के कारण जब प्रभाव किसी राशि पर पड़ता है तो इसे साढ़ेसाती कहते है। जब शनि किसी राशि के 12वें घर या उस राशि के दूसरे भाव में होता है, तो संबंधित राशि पर साढ़ेसाती चल रही होती है। शनैश्चर एक राशि को तीन बार प्रभावित करते है। ढाई साल के तीन चरण साढ़े सात साल के रूप में चलते हैं।

क्या होता है साढ़े साती का प्रभाव?

यह भ्रांति है कि शनि देव सदैव अशुभ फल देते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। शनि देव के नाम से आमतौर पर डराया जाता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। सबसे पहले आपको अपनी जन्म कुंडली में शनि की स्थित देखनी होगी। तब समझ सकते है कि साढ़ेसाती अच्छी है या बुरी।

साढ़े साती का शुभ फल मिलने पर जीवन में सफलता मिलती है। जातक को धन और बड़े पद की प्राप्ति होती है। साथ ही विदेश यात्रा की संभावना भी बनी रहती है। अगर साढ़े साती अशुभ फल दे तो नौकरी छूट जाती है। स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। साढ़े साती मानसिक स्थिति को बुरी तरह से प्रभावित करती है।

साढ़े साती का ये है उपाय :

सुबह-शाम शनि मंत्र का जाप करें। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। खाने में सरसों का तेल, गुड़ और काले चने का उपयोग करें। अपना व्यवहार और आचरण अच्छा रखें। अपने बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में लोहे का छक्का पहनना चाहिए। शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद शनि की पूजा करना लाभकारी होता है। इसके अलावा हर शनिवार को सामान्य रूप से शनि देव पर काला कपड़ा, काली तिल , काली उड़द और सरसों का तेल चढायें।