सिर्फ PSC ही नहीं, आधा दर्जन और भर्तियाें में भी नौकरियों को किया गया बंदरबांट।

रायपुर : PSC में नौकरियों को लेकर फर्जीवाड़ा हुआ है, जहाँ अपने लोगों को नौकरियां दी गई है। सीजीपीएससी 2022 में बेटा-भतीजा की नौकरी लगाने की खबरों ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं थी। लेकिन, ये इकलौता मामला नहीं है। इसके अलावा भी आधा दर्जन भर्तियों में फर्जीवाड़ा कर चहेतों को नौकरी पर लगाने का खेल खेला गया है। ऐसी शिकायत पीड़ित अभ्यर्थियों ने भाजपा नेताओं से की है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थियों की टोली भाजपा नेताओं से मुलाकात के लिए लगातार राजधानी पहुंच रही है।

3 दिसंबर को भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद से ही अभ्यर्थियों ने न्याय की आस में भाजपा नेताओं से मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया था। 9 दिन में 12 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। ज्यादातर बैठकें गढ़ कलेवा में हुई हैं। इन बैठकों में अभ्यर्थियों ने सीजीपीएससी 2022 के अलावा 20-21 में हुई परीक्षा, सब इंस्पेक्टर भर्ती, सहायक अध्यापक, अतिथि शिक्षक, वन रक्षक और व्यापमं की ओर से निकाले गए भर्ती प्रक्रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टूडेंट्स का कहना है कि भाजपा अपने वादे के मुताबिक भर्ती घोटाले की जल्द से जल्द सीबीआई जांच कराए। वहीं, भाजपा ने बैठकों में मिले इनपुट को नोट कर कैबिनेट की पहली बैठक में स्टूडेंट्स को न्याय दिलाने की बात कही है।

त्रिस्तरीय जांच के बाद भी गलत जवाब वालों को ज्यादा नंबर दिए :

पीएससी में आंसर शीट की जांच तीन स्तरीय होती है। इसकी जिम्मेदारी एग्जामिनर, डिप्टी हेड एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर की होती है। स्टूडेंट्स ने जब आरटीआई से आंसर शीट निकलवाया तो पाया कि सवालों का गलत जवाब देने वाले अभ्यर्थियों को भी तीनों एग्जामिनर ने एक समान नंबर दिए हैं। ऐसा करके अयोग्य अपने लोगों को नौकरियां दी गई है।

22 हजार कॉपी महज 40 दिन में जंचवा दी, वो भी तीन-तीन बार :

पीएएएसी 2022 के मेंस एग्जाम जून में हुए थे। पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी का रिटायरमेंट सितंबर में तय था। रिटायरमेंट से पहले उन्होंने महज 40 दिन में 22 हजार कॉपियों की तीन-तीन बार जांच करवाकर परिणाम जारी करवा दिए। जबकि, आम दिनों में मेंस के रिजल्ट दिसंबर तक जारी होते रहे हैं। ये सभी बातें संदेह के दायरे में आती है।

6 साल से एक परीक्षा नियंत्रक, तत्काल हटाने की उठाई मांग :

भाजपा नेताओं से मेल-मुलाकात के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टूडेंट़स के मुताबिक एग्जाम करवाने से लेकर परीक्षा परिणाम जारी करने तक परीक्षा नियंत्रक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बीते 6 सालों में कई अध्यक्ष आए और गए। लेकिन, आरती वासनिक यहीं जमे रहीं। इस पूरे घोटाले में उन्हें भी जिम्मेदार मानते हुए सख्त कार्यवाही की मांग की गई है।

लूप, जिनकी वजह से कारनामा संभव
1. सिलेबस
लूप होल: सीजीपीएससी का सिलेबस लेंदी और व्रस्ट है। ये हम नहीं कहते। खुद अभ्यर्थी ऐसा मानते हैं। इनमें से कुछ ने पूर्व आईएएस ओपी चौधरी से मिलकर बदलाव की मांग की थी। ओपी ने भी बदलाव की जरूरत को स्वीकारा था। दृष्टि आईएएस के विकास दिव्यकीर्ति भी इसे व्रस्ट और लेंदी सिलेबस बता चुके हैं।

फायदा: इसका फायदा उठाते हुए ऐसे सवाल पूछे गए जिनके मल्टीपल जवाब हों। इस तरह मल्टीपल आंसर को आधार मानते हुए किसी के जवाब को सही मान लिया गया तो किसी के जवाब को गलत बताते हुए माइनस मार्किंग कर दी गई। अभ्यर्थियों ने आरटीआई के तहत ऐसे कई उदाहरण निकाले हैं।

2. माॅडल आंसर

लूप होल: 2019 से पहले तक अमेंडेड मॉडल आंसर मेंस के आसपास जारी कर दिए जाते थे। लेकिन, 2019 में लोक सेवा आयोग ने एकाएक अपने नियमों में बदलाव करते हुए इसकी तारीख आगे बढ़ा दी। इसके तहत अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के बाद अमेंडेड मॉडल आंसर मिलने लगे, जिसका कोई मतलब नहीं रह जाता था।

फायदा: सिलेबस के आधार पर सवालों में फर्जीवाड़ा करने के लिए ही एमेंडेड मॉडल आंसर में खेल किया गया। नियमत: 10% सवाल गलत होने पर पेपर रद्द माना जाता है। लेकिन, पीएससी ने एमेंडेड मॉडल आंसर ही इंटरव्यू के बाद जारी किए, ताकि चुने हुए लोगों की ज्वाइनिंग से पहले कोई हंगामा खड़ा न हो पाए।