रायपुर : पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार के करीबी अफसर IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और CM सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत, अवैध दलाली के बेहिसाब पैसे का खेल चल रहा है, जिसमें रायपुर महापौर एजाज ढेबर का भाई अनवर ढेबर अवैध वसूली करता है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर ED ने 18 नवंबर, 2022 को PMLA Act के तहत मामला दर्ज किया था। आयकर विभाग से मिले दस्तावेज के आधार पर ED ने अब तक की जांच, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद 2161 करोड़ के घोटाले की बात का कोर्ट में पेश चार्जशीट में जिक्र किया है। अब यह मामला कोर्ट में है जिसको लेकर कोर्ट ने ED को आदेश दिया है कि दो हफ्ते में ईसीआईआर रिपोर्ट पेश कोर्ट में पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब अनियमितता मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय को दो हफ्ते के भीतर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआइआर) पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इसी अवधि में उस FIR की प्रति भी पेश करनी होगी जिसके आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकायत दर्ज की है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह निर्देश पारित किया है। अदालत ने 15 फरवरी का मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इस मामले में आइएएस अनिल टुटेजा और उनके पुत्र यश टुटेजा के अधिवक्ता मनीष भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। जिसमें यश टुटेजा ने धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 की धारा 50 और धारा 63 की शक्तियों को चुनौती दी है। याचिका में ED की ओर से उन्हें धारा 50 के तहत जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की गई है। इस घोटाले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में काफी बवाल मचा था।
अनवर ढेबर और करिश्मा ने भी दायर की है याचिका :
इसी तरह की याचिका अनवर ढेबर और करिश्मा ने भी दायर की है। इससे पहले बीते वर्ष के अक्टूबर की शुरुआत में अदालत ने ED को छत्तीसगढ़ शराब अनियमितता मामले से संबंधित मनी लान्ड्रिंग मामले में कुछ समय के लिए रोकने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत ने यह मौखिक टिप्पणी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दी थी।
ED की जांच में आया ये सामने :
ED की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 से लेकर 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी ने होटल कारोबारी अनवर ढेबर के साथ मिलकर बड़ा शराब घोटाला किया था जो कि 2000 करोड़ रूपये से ज्यादा का था। दोनों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश करके नीतिगत बदलाव किए। जिससे अनवर ढेबर के सहयोगियों को टेंडर मिला। ED का आरोप है कि राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने राज्य संचालित दुकानों से बेहिसाब कच्ची शराब भी बेची।ED का यह भी आरोप है कि ढेबर और त्रिपाठी की मिलीभगत से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है और शराब सिंडिकेट ने दो हजार करोड़ रुपये कमाए। जिसका कमीशन ढेबर और त्रिपाठी को मिला। इस मामले में तत्कालीन विपक्षी पार्टी भाजपा ने गंभीर आरोप भी लगाये थे।
कई जगह छापेमारी, करोड़ों की संपत्ति मिली :
ED की ओर से इस मामले में रायपुर, भिलाई और मुंबई में चलाए गए तलाशी अभियान में करोड़ों की संपत्ति मिली है। अनवर ढेबर की अटल नगर में 53 एकड़ जमीन का सुराग मिला। 21.60 करोड़ की कीमत वाली इस संपत्ति को शराब लाइसेंसधारी से अर्जित अपराध की आय का उपयोग करके एक सहयोगी के नाम पर लेनदेन कर खरीदी गई थी। मुंबई में तलाशी के दौरान शराब ठेकेदार के सहयोगी अरविंद सिंह और उसकी पत्नी पिंकी सिंह के नाम पर एक शेयर ट्रेडिंग फर्म में लगभग एक करोड़ रुपये का बेहिसाब निवेश पाया गया और इसे पीएमएलए के तहत फ्रीज कर दिया गया है। ED ने शराब ठेकेदार त्रिलोक सिंह ढिल्लन की 27.5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त कर ली थी। इससे पहले ED ने एक देशी शराब डिस्टिलर के घर से 28 करोड़ रुपये के आभूषण जब्त किये थे। उक्त मामले में शराब घोटाले के आरोपियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।