दुर्ग/भिलाई : छत्तीसगढ़ के रसमड़ा स्थित सतबहिनिया मंदिर के पास छह महीने पहले हुई हत्या का रहस्य फिल्मों की तरह सुलझा। पुलिस ने जले हुए शव के पास मिले आधार कार्ड से मृतक की पहचान तय कर ली थी। इधर, छह माह बाद आई डीएनए रिपोर्ट में यह शव किसी और का निकल गया। पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू कर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। चार माह पहले सतबहनिया मंदिर रसमड़ा में हुए अंधे कत्ल की गुत्थी अब पुलिस ने सुलझा ली है। आरोपी रामचरण चंद्राकर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह शक्ति नगर दुर्ग का निवासी है और सतबहनिया मंदिर में रहता था। मृतक का नाम राजू था, पर वह कहां का रहने वाला था यह अभी पता नहीं चला है।
बीते वर्ष 30 जुलाई की सुबह चबूतरे पर एक युवक की जली हुई लाश मिली थी। शव के समीप मिले आधार कार्ड में शक्ति नगर दुर्ग निवासी रामचरण चंद्राकर का नाम और पता लिखा था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने ये मान लिया कि मृतक रामचरण ही है। औपचारिक रूप से पहचान करने के लिए जब पुलिस ने मृतक के शव और रामचरण चंद्राकर की मां का डीएनए टेस्ट कराया तो उसमें रिपोर्ट का मिलान नहीं हुआ।
रेलवे स्टेशन में हुई थी मुलाकात :
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि 27 जुलाई 2023 को लोकल ट्रेन से साल्हेकसा, महाराष्ट्र में उतरकर पटरी-पटरी डिब्बा बीनते हुए दर्रेकसा की ओर जा रहा था। वहीं बीच रेलवे ट्रेक में एक व्यक्ति मिला। उसने अपना नाम राजू (40 वर्ष) बताया। राजू ने बताया कि वह बेघर है, इसलिए अपने साथ ले चलो। तब रामचरण चंद्राकर उसे अपने साथ रसमड़ा सतबहनिया मंदिर लाया। पुलिस के अनुसार, आरोपी चोरी के सामान को बिकवाने का काम करता था। उसने पुलिस को बताया कि मृतक का नाम राजू है। रेलवे स्टेशन में हुई मुलाकात के बाद दोनों साथ मिलकर चोरी करने लगे थे। इसी बीच घटना की रात चोरी को लेकर विवाद के बाद मृतक आक्रोश में आ गया और मंदिर की मूर्तियों को क्षति पहुंचाने लगा।
अपने साथी का त्रिशूल घोंपकर कर दी थी हत्या :
पुलिस के अनुसार, रामचरण 30 जुलाई को दोपहर 12 बजे मंदिर आया, तो राजू एक बाईक से आकर मंदिर में बैठा था। मंदिर में बैठकर मछली खाया था, शराब पिया था। अपने साथ वह बोरी में रिंग जैसा सामान लेकर आया था। पूछने पर बताया कि सामान रेलवे का है, रामचरण ने मना किया। राजू भड़क गया और गाली देने लगा। दोनों में मारपीट हुई। त्रिशूल से हमले में राजू मारा गया। जाते-जाते रामचरण ने अपना आधार कार्ड वहीं पर फेंक दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपनी पत्नी की भी इसी तरह हत्या कर चुका है। पत्नी की हत्या के दोष में जेल से छूटने के बाद वह राजनांदगांव स्थिति छुरिया पहाड़ पर स्थित काली मंदिर में पूजा-पाठ करने लगा था।
गुत्थी सुलझाने में लगी हुई थी टीम :
अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने थाना प्रभारी मोहन नगर, चौकी प्रभारी अंजोरा रामनारायण सिंह ध्रुव के नेतृत्व में टीम ने प्रयास शुरू किया। रामचरण चंद्राकर फरार था, इसकी पतासाजी की जा रही थी, इसके लिए मुखबिरी हुई कि सोमवार को रामचरण चंद्राकर अपने घर शक्तिगनर, दुर्ग आया है। तुरंत पुलिस पहुंची। उस समय वह ग्रीन चौक के पास पकड़ा गया। घर में ताला लगे होने पर वह वापस रायपुर जाने के लिए पैदल स्टेशन की ओर जा रहा था। पुलिस की टीम ने उसे गिरफ्तार का लिया।