रायपुर : महज दो लाख रूपये की रकम महंगे ब्याज में लेने के कारण मूल ज्यादा से ब्याज चुकाने के बाद भी सूदखोर नीरज का पीछा नहीं छोड़ रहे थे, अब इस मामले में पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठने लगे है। राजधानी में कर्ज का ब्याज वसूलने के लिए सूदखोरों ने गुंडे और बदमाश लगा रखे हैं। कई हिस्ट्रीशीटर भी ब्याज वसूलने का काम कर रहे हैं। तेलीबांधा के गली-7 में रहने वाले नीरज कामरानी के खुदकुशी के मामले में कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही है। नीरज के परिजनों को भी इसी तरह के गुंडे-बदमाश भेजकर उठवाने की धमकी दी जा रही थी। ज्ञात हो की पैसे की रिकवरी करवाना मुश्किल होता है, इसलिये सूदखोर बदमाशों को वसूली के लिये काम पर रखते है।
वहीँ जानकार सूत्रों के मुताबिक खुदकुशी के एक दिन पहले भी नीरज को ब्याज का पैसा देने के लिए इसी तरह धमकाया गया था। इससे परेशान होकर वह अपनी नई दोपहिया को गिरवी रखने के लिए कुछ परिचितों के पास गया था, लेकिन कोई गिरवी नहीं रखा। इससे वह मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया था। दूसरी ओर पुलिस ने नीरज की खुदकुशी के मामले की जांच के नाम पर खानापूर्ति शुरू कर दी है। अभी तक आरोपी महिलाओं के मोबाईल की कॉल डिटेल की जानकारी नहीं ली गई। और न ही आसपास के मोहल्ले वालों के बयान, सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई है। इस मुद्दे पर पुलिस ने अभी तक कोई खास तहकीकात नहीं की है, जिस पर कार्यवाही को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि नीरज ने सोमवार-मंगलवार की रात खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने कर्ज के चलते खुदकुशी करने का जिक्र किया है। खुदकुशी के लिए सविता बजाज और कमला लच्छेदानी को जिम्मेदार बताया है। उसके परिजनों ने 2 लाख कर्ज के एवज में दोनों महिलाओं द्वारा अधिक ब्याज वसूलने का आरोप लगाया है। क्या यह आरोप गलत हो सकता है?
ऊपर से सबसे बड़ा सवाल :
मामले की जांच के संबंध तेलीबांधा टीआई फैजुल होदाशाह का कहना है कि सुसाइड नोट में जिन महिलाओं के नाम आए हैं, उनसे मृतक के परिवार ने बीसी का करीब डेढ़ लाख रुपए लिया था। दोनों महिलाएं उसी राशि की मांग कर रही थीं। टीआई के दावे को अगर सही मान भी लें, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीरज के अलावा उनका बड़ा भाई और उनके पिताजी भी काम करते थे। तीनों मिलाकर करीब 40-45 हजार रुपए हर महीना कमा ही लेते थे। इससे बीसी का डेढ़ लाख रुपए का कर्ज आसानी से वापस कर सकते थे। थोड़ा-थोड़ा करके भी लौटा सकते थे। फिर भी नीरज को खुदकुशी क्यों करनी पड़ गई? दूसरी तरफ उनके परिवार वाले किसी पर इतना बड़ा आरोप बेवजह जबरदस्ती क्यों लगाएंगे? सुसाइड नोट में कोई दोनों महिलाओं का नाम भी बेवजह क्यों लिखेगा?
ऐसे आएगी सच्चाई सामने :
नीरज द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट की फिंगरप्रिंट और हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच
जिन महिलाओं के नाम लिखे गए हैं, उनके मोबाइल के कॉल डिटेल की जांच। इससे दोनों कब-कब नीरज के परिवार वालों को कॉल करते थे? इसका पता चलेगा।
मृतक के आसपास रहने वालों के बयान
खुदकुशी के एक दिन पहले नीरज की किस-किस से बातचीत हुई? उसके दोस्तों के बयान आदि।
सुसाइड नोट में जिन महिलाओं के कामकाज, आर्थिक लेन-देन आदि की जांच।
सूदखोरों का बढ़ रहा आतंक और मकड़जाल :
वहीँ जानकारी के अनुसार रायपुर में सूदखोरी का मकड़जाल लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ब्याज पर पैसा देने वाले सूदखोर पैसा वसूलने गुर्गों की मदद से कर्जदारों को धमका रहे हैं। इनसे परेशान लोग प्रापर्टी बेचकर पैसा चुकाते हैं और आखिर में खुदकुशी तक कर लेते हैं, फिर भी सूदखोरों की वसूली खत्म नहीं होती। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में युवक की खुदकुशी के बाद सूदखोरी के कारोबार की पड़ताल के बाद जो सामने आया वो चौकाने वाला है।
इस कारोबार से जुड़े कुछ लोगों से बातचीत में खुलासा हुआ कि हर महीने ब्याज पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बाजार में खप रही है। 300 से अधिक कारोबारी यह काम कर रहे हैं। ब्याज पर पैसा देने वालों के लिए साहूकारी लाइसेंस अनिवार्य किया गया है, लेकिन 90 प्रतिशत लोगों के पास लाइसेंस नहीं है। जिम्मेदार अफसर लाइसेंस बनाने की सुध नहीं ले रहे हैं। ब्याज पर पैसा देने वालों को यह काम करने के लिए साहूकारी लाइसेंस लेना जरूरी है। लेकिन इस नियम का पालन कहीं नहीं किया जा रहा। बगैर लाइसेंस के ही हजारों फाइनेंस ब्रोकर, हुंडी कारोबारी रोज करोड़ों रुपये का लेनदेन कर रहे हैं। साहूकारी लायसेंस तहसील से बनता है।