मतांतरण को लेकर अंबिकापुर और जशपुर में बवाल, बाहर से आये लोग कर रहे थे हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध अमर्यादित टिप्पणी।

अंबिकापुर : जहाँ छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने अब 10 साल की सजा का प्रावधान तय किया है वहीँ जिला मुख्यालय बलरामपुर के वार्ड क्रमांक तीन में स्थित एक घर में बाहरी लोगों द्वारा मतांतरण कराए जाने के आरोप से बवाल मच गया है। हिंदू संगठन से जुड़े लोगों के पहुंचने के बाद कार्यक्रम बंद कर बाहरी लोग भागने का प्रयास करने लगे। वाद-विवाद की स्थिति के बीच पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अभी तक किसी के खिलाफ प्राथमिकी नहीं हुई है।

बलरामपुर के एक घर में झारखंड से आए कुछ लोगों द्वारा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि इस कार्यक्रम में शामिल स्थानीय लोगों को मत परिवर्तन के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध अमर्यादित टिप्पणी की जा रही थी। इस बात की जानकारी कार्यक्रम में शामिल एक व्यक्ति द्वारा हिंदू संगठन के पदाधिकारियों को दे दी गई। हिंदू संगठन के पदाधिकारी जब मौके पर पहुंचे तो आयोजकों ने उनका विरोध कर दिया। इससे माहौल और बिगड़ गया। दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। विवाद की खबर पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही कुछ लोग भाग खड़े हुए। इस गतिविधि में संलिप्त कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

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इस पूरे आयोजन का सूत्रधार पास्टर संतोष नामक व्यक्ति को बताया जा रहा है जो बलरामपुर में ही एक आराधनालय का संचालन करता है। मामले में हिंदू संगठन के लोगों ने लिखित शिकायत भी की है। आरोप है कि जिला मुख्यालय बलरामपुर के अलावा आसपास के क्षेत्र में मतांतरण कराने वाले सक्रिय है जो भोले-भाले लोगों को नकदी के साथ शिक्षा-स्वास्थ्य का प्रलोभन देकर मतांतरण के लिए प्रेरित करते है।

वहीँ ऐसा ही मामला जशपुरनगर से भी सामने आया है : 

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जशपुरनगर जिले में एक बार फिर चंगाई सभा (मतांतरितों द्वारा बीमारी ठीक करने का दावा करते हुए प्रार्थना सभा) के आयोजन को लेकर ग्रामीणों ने जमकर बवाल किया। ग्रामीणों द्वारा प्रार्थना सभा पर पहुंचते ही चंगाई सभा करा रहा पास्टर मौके से भाग निकला। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम ने पूछताछ के लिए चंगाई सभा के आयोजकों को थाने में बैठा लिया और फरार हुए पास्टर की खोजबीन में पुलिस जुटी हुई है।

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घटना जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र के करमटोली बस्ती की है। जानकारी के अनुसार दोकड़ा के समीप स्थित करमटोली के ईसाई बस्ती में सोमवार को चंगाई सभा का आयोजन किया गया था। इस चंगाई सभा में प्रार्थना कराने के लिए पड़ोसी राज्य ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के तलसरा से एक पास्टर अपने पांच साथियों के साथ आया हुआ था। आसपास के हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को जैसे ही इस चंगाई सभा की जानकारी मिली वे ईसाई बस्ती पहुंच गए और मतांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध करने लगे। घटना की सूचना मिलने पर दोकड़ा चौकी पुलिस टीम घटनास्थल पहुंचे। चौकी प्रभारी टेकराम सारथी ने बताया कि घटना की सूचना पर चंगाई सभा का आयोजन कराने वाले रफेल खलखों (50) को हिरासत में लिया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में चंगाई सभा और मतांतरण को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बन रही है। छत्तीसगढ़ में जगह-जगह लोगों को प्रलोभन देकर मतंतातरण की ख़बरें लगातार सामने आ रही है।

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वहीँ इससे पहले भी कोतवाली थाना क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम जुरगुम में भी एक घर में चंगाई प्रार्थना सभा का मामला सामने आया था। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने जनपद पंचायत जशपुर के उपाध्यक्ष राजकपूर भगत की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए झारखंड के पास्टर को गिरफ्तार किया गया था। ऐसे मामले बीते पांच सालों में दुगुने हुये है। अब इन मामलों पर राज्य सरकार ने 10 साल की सजा का प्रावधान बनाया है।

शिकायत पर कार्यवाही करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। : टेकराम सारथी,चौकी प्रभारी,दोकड़ा