यात्रियों की बैंड बजाने के बाद भी रेलवे घाटे में, यात्री ट्रेनों से स्लीपर कोच हो रहे कम, एसी कोच से यात्रियों की जेब पर दुगुना भार, इतनी मुसीबतें की गिनाना मुश्किल।

रायपुर : सालों से रेलवे संचालन को लेकर आम आदमी परेशान रहा है, वैसे तो कहने को पूरी दुनिया सस्ती यात्रा मुहैया करवाने वाली भारतीय रेल है, लेकिन उसका फायदा आम आदमी को क्या और कैसे मिल रहा है? लालू प्रसाद यादव ने रेलमंत्री रहते हुये रेलवे में तत्काल सिस्टम लागू करके मध्यवर्गीय यात्रियों की जेब डाका डाला था, अब उस श्रेणी में गरीब वर्ग यात्रा कर रहा है। वहीँ उससे भी गरीब तबका लोकल टिकट नहीं खरीद पा रहा है। जब लालू रेलमंत्री था तो बताया गया रेल फायदे में चल रही है, फिर ऐसा क्या हुआ की घाटे में चलने लगी। वहीँ लगातार माल परिवहन से मुनाफा कमाने के बाद और डायनामिक भाड़ा बढ़ाकर लेने के बावजूद रेलवे में क्या घाटा हो रहा है? ये सवाल लोगों के मन में लगातार चल रहा है।

रेलवे का डायनामिक भाड़े में स्लीपर का भाड़ा चार गुना तक बढ़ जाता है, वहीँ रायपुर से दिल्ली तक का स्लीपर का भाड़ा 2000/- तक पार कर जाता है, एसी का भाड़ा तो लगभग हवाई यात्रा का किराया ले लेता है। फिर भी जब आप टिकट लेते है तो उस पर लिखा रहता है, रेलवे आपसे यात्रा का केवल 57 % भाड़ा ही वसूल करती है। जब इतने ज्यादा भाड़ा लेने के बाद भी रेलवे कहता है कि केवल 57 % भाड़ा ही वसूल करती है, तो यह आम लोगों के साथ मजाक है अथवा आम आदमी बेवकूफ है या ठगा जा रहा है? वहीँ कई यात्री तो लोकल टिकट का किराया बड़ी मुश्किल से वहन कर पाते है।

वहीँ भारतीय रेल में इन दिनों लगातार स्लीपर कोच की संख्या घटाने और एसी कोच की संख्या बढ़ाने से कम आय वाले रेल यात्री परेशान हैं। क्योंकि एक तरफ स्लीपर कोच की संख्या घटने से उन्हें मजबूरन एसी टिकट लेना पड़ रहा है। वहीं टिकट कंफर्म न होने से स्लीपर कोच में बेदम करने वाली भीड़ देखी जा रही है। यात्रियों को लगातार मुसीबत उठानी पड़ रही है रेवांचल एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस समेत कुछ अन्य ट्रेनों में छह स्लीपर कोच को कम कर दिया गया है। उनकी जगह दो थर्ड एसी इकोनामी कोच लगा दिए गए हैं। थर्ड एसी इकोनामी कोच का किराया स्लीपर के किराए से दोगुने से भी अधिक है।

गर्मी की छुट्टी और शादी के समय तो अत्यधिक भीड़ :

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रेलवे ने एलएचबी रैक के ट्रेनों में स्लीपर कोचों की संख्या कम कर दी है। नतीजा यह है कि परेशानियों के कारण यात्रियों का सफर करना कठिन बन गया है। स्लीपर कोच की कमी के कारण स्लीपर की हालत सामान्य बोगी जैसी हो गई है। गर्मी की छुट्टी और शादी के समय तो अत्यधिक भीड़ के कारण यात्रियों की फजीहत हो रही है। अब स्लीपर कोच कम होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक थर्ड एसी इकोनामी का किराया थर्ड एसी से थोड़ा कम होता है, जबकि मात्र 100/- का फर्क है। लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए रेलवे की ओर से स्लीपर कोच की जगह थर्ड एसी इकोनामिक कोच ट्रेनों में लगाए जा रहे हैं। यहाँ लोकल का किराया भरना मुश्किल है, लोग एसी में कैसे सफर करें।

रायपुर से नागपुर शिवनाथ का भाड़ा :

स्लीपर में सामान्य भाड़ा 200 से 250 , 3rd एसी में 500 से 550 , तत्काल में स्लीपर में भाड़ा 400 से 450 , 3rd एसी में 1100 से 1150

रायपुर से दिल्ली गोंडवाना का भाड़ा :

1.स्लीपर में सामान्य भाड़ा लगभग 650 , 3rd एसी में 1650/-

2.तत्काल में स्लीपर में सामान्य भाड़ा 800 , 3rd एसी में 2100/-स्लीपर

3. प्रीमियम तत्काल में स्लीपर का भाड़ा 1600/- पार तक, वहीँ 3rd एसी में 3500/- पार तक, जबकि 2nd और 1st में सोच के परे है।

वहीँ दूसरी तरफ इतनी महंगी टिकट लेने के बाद भी सुगम और सरल यात्रा नहीं हो पा रही है और अचानक से ट्रेन का रूट बदल दिया जा रहा है या ट्रेनें रद्द कर दी जा रही है। फिर हवाई यात्रा सस्ते में कैसे हो रहे है? प्रीमियम तत्काल के एसी भाड़े के लगभग हवाई यात्रा हो रही है वो भी 28% जीएसटी और अतिरिक्त सर्विस चार्ज जोड़ने के बावजूद। कम्पनियाँ फिर भी लाभ में चल रही है।

यात्रियों को हो रही परेशानी :

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भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और रीवा के बीच चलने वाली रेवांचल एक्सप्रेस में पहले स्लीपर के 12 कोच होते थे, लेकिन इनमें से छह कोच को हटा दिया गया है। इनकी जगह ट्रेन के एसी कोच लगा दिए गए हैं। अब सिर्फ छह स्लीपर कोच बचे हुए हैं। इसी तरह भोपाल से दिल्ली जाने वाली भोपाल एक्सप्रेस में भी पहले 12 स्लीपर कोच होते थे, अब इस ट्रेन में भी छह स्लीपर कोच लगाए जा रहे हैं। अलग-अलग रूटों में लगभग सब ट्रेनों में यही हालत है।

यह है किराया :

रेवांचल एक्सप्रेस

स्लीपर – 355 रुपये

एसी इकोनामी – 855 रुपये

भोपाल एक्सप्रेस

स्लीपर – 410 रुपये

एसी इकोनामी – 995 रुपये

इन यात्रियों का कहना है :

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ट्रेन से भोपाल से रीवा आए। स्लीपर कोच कम होने के कारण बचे हुए कोच में बहुत ज्यादा भीड़ थी। हालात जनरल डिब्बे जैसे थे, क्योंकि जिन लोगों का टिकट वेटिंग में था। वह कंफर्म न होने के कारण ऐसे सभी यात्री कोच में मौजूद थे, जिससे डिब्बों के लोगों के बहुत बुरे हालत थे। पहले ये भीड़ कई स्लीपर कोच में बंट जाती थी, इससे समस्या नहीं होती थी।

– प्रदीप नापित, यात्री

पहले स्लीपर कोच में टिकट आसानी से मिल जाते थे, लेकिन कोच को कम करने के बाद से स्लीपर में ज्यादातर वेटिंग ही रहती है। वहीं थर्ड एसी इकोनामी में भी किराया स्लीपर से दो गुना है, इससे यात्रा की जेब पर काफी असर पड़ रहा है। अब टिकट कंफर्म होने के बाद भी भीड़ के कारण पूरी सीट नहीं मिल पा रही हैं।

– नम्रता नागर, यात्री