कोलकाता(प. बंगाल) : 13 सालों के बाद भी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का ‘मां, माटी, मानुष’ का जलवा बरकरार है।पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनावों में न संदेशखाली का मुद्दा चला और न ही सीएए का। दीदी ने अकेले ही बीजेपी के इन दोनों तीरों को निपटा दिया। जो काम उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मिलकर किया उससे भी बेहतर तरीके से ममता बनर्जी ने बंगाल में कर दिया। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों की सहायता के बिना दीदी ने आखिर ये सब कैसे कर लिया? ब्रह्मास्त्र के बलबूते भारतीय जनता पार्टी के हर दांव को उन्होंने तहस नहस कर दिया। इतना ही नहीं बीजेपी साल 2019 के आंकड़े को भी नहीं छू पाई और उसकी सीटो की संख्या में भारी कमी आई है। लेफ्ट और कांग्रेस को भी बंगाल में औकात बता दी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। पार्टी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को लोकसभा में पार्टी के नेता के रूप में, डॉ काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में उपनेता के रूप में चुना गया है। कल्याण बनर्जी मुख्य सचेतक चुने गए हैं। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को राज्यसभा में पार्टी का नेता, सागरिका घोष को उपनेता और नदीमुल हक को मुख्य सचेतक चुना गया है।
छोटी – छोटी नवकन्या घर आये , पूरा सुने यह मधुर भजन और हमारे चैनल को सब्सक्राईब करें, इस लिंक पर क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=8OLfH1w-yBw
ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे खेद है, लेकिन मैं सरकार बनाने के लिए एक असंवैधानिक, अवैध पार्टी को शुभकामनाएं नहीं दे सकती। मेरी शुभकामनाएं देश के लिए होंगी। मैं सभी सांसदों से कहूंगी कि वे अपनी पार्टी को मजबूत करें। हम आपकी पार्टी नहीं तोड़ेंगे, लेकिन अंदर से आपकी पार्टी में फूट है। आपकी पार्टी में लोग खुश नहीं हैं।



