मक्का/सऊदी अरब : पूरी दुनिया में इस समय गर्मी अपने चरम पर है, खबर है कि सऊदी अरब के मक्का में हज करने गए 1000 लोगों की गर्मी से मौत हो गई है। एक अरबी डिप्लोमैट ने बताया कि मरने वालों में करीब 658 हाजी अकेले मिस्र के हैं। वहीं 1400 लोग अब भी लापता हैं। हालांकि सऊदी अरब की तरह से अब तक मरने वालों की संख्या को लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है। मिडिल ईस्ट में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मक्का में 17 जून को तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं 18 जून को थोड़ी राहत के साथ पारा 47 डिग्री रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 से 19 जून तक चले हज के बीच 70 भारतीय यात्रियों की भी मौत हुई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस साल सबसे ज्यादा 1,75,000 भारतीय हज यात्रा के लिए मक्का पहुंचे है। केरल के हज मंत्री अब्दुर्रहीमन ने बुधवार को केंद्र सरकार से भारतीयों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
हर साल की तरह इस साल भी 18 लाख से ज्यादा मुस्लिम अकीदतमंद हज करने के लिए सऊदी अरब के मक्का-मदीना पहुंचे हैं। लेकिन इस बार हज यात्रियों को भीषण गर्मी और लू का सामना कर पड़ रहा है। इस बार गर्मी अपने चरम स्तर पर है। हैरान करने वाली बात यह है कि लू की वजह से अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मरने वालों में आधे से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन किए वहां पहुंचे हज यात्री थे। जो कि कई बार पैसे ना होने के कारण अवैध तरीके से चले जाते है।
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जानकारी के अनुसार हज के दौरान गुरुवार को मरने वालों में मिस्र के 58 लोग शामिल थे। हज यात्रा पर पहुंचे लगभग 10 देशों के 1,081 लोगों की लू के कारण मौतें हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े आधिकारिक बयानों या यहां काम कर रहे राजनयिकों से आए हैं। अभी इसमें और बढ़ोत्तरी होने की खबर है।
इस सप्ताह की शुरुआत में मौसम एजेंसियों ने मक्का के ग्रैंड मस्जिद में 51 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान की सूचना दी थी। जो कि सहन करने की सीमा से ज्यादा है। वहीं, पिछले महीने छपी एक सऊदी रिसर्च के मुताबिक, क्षेत्र में तापमान हर दशक में 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है। जबकि इस साल सऊदी अफसरों ने हजारों अपंजीकृत हज यात्रियों को हज के लिए मंजूरी दे दी। चूंकि अपंजीकृत हज यात्रियों को वातानुकूलित क्षेत्रों और अन्य सुविधाओं की मंजूरी नहीं थी, इसलिए वे हीटवेव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, इन्हीं की संख्या मरने वालों में ज्यादा रही है।
एक अरब राजनयिक ने गुरुवार को एएफपी को बताया, “अराफात से पहले हज यात्री थक गए थे। “ज्यादातर हज यात्रियों की मौत का मुख्य कारण ज्यादा गर्मी थी, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याएं और अन्य समस्याएं पैदा हुईं। हज यात्रा में में मिस्र के अलावा, मलेशिया, पाकिस्तान, भारत, जॉर्डन, इंडोनेशिया, ईरान, सेनेगल, ट्यूनीशिया और इराक के स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्रों के हज यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि कई मामलों में अफसरों ने कारण मौत की वजह नहीं बताई है। अब इसमें आगे और कितनी मौतों की जानकारी सामने आयेगी कह पाना मुश्किल है।
क्या है हजयात्रा :
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इस्लाम में 5 फर्ज में से एक फर्ज हज है। मान्यताओं के मुताबिक, हर मुस्लिम व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार इस फर्ज को पूरा करना होता है। जानकारी के अनुसार साल 628 में पैगंबर मोहम्मद ने अपने 1400 शिष्यों के साथ एक यात्रा शुरू की थी। ये इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी थी और इसी यात्रा में पैगंबर इब्राहिम की धार्मिक परंपरा को फिर से स्थापित किया गया। इसी को हज कहा जाता है।
हर साल दुनियाभर के मुस्लिम सऊदी अरब के मक्का में हज के लिए पहुंचते हैं। हज में पांच दिन लगते हैं और ये ईद उल अजहा या बकरीद के साथ पूरी होती है। सऊदी अरब हर देश के हिसाब से हज का कोटा तैयार करता है। इनमें इंडोनेशिया का कोटा सबसे ज्यादा है। इसके बाद पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, नाइजीरिया का नंबर आता है। इसके अलावा ईरान, तुर्किये, मिस्र, इथियोपिया समेत कई देशों से हज यात्री आते हैं। हज यात्री पहले सऊदी अरब के जेद्दाह शहर पहुंचते हैं। वहां से वो बस के जरिए मक्का शहर जाते हैं। यह हर मुस्लिम के लिये जरुरी माना जाता है।



