सराहनीय प्रयास : मोहल्लेवासियों ने किया बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, इंसानियत आज भी जिन्दा है।

बिलासपुर : कहते जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है यह कहावत बिलासपुर के क्रांति नगर क्षेत्र में सच साबित हुई, जब मोहल्लेवासियों ने अपने पड़ोसी पी. चलपती राव का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया, इस सराहनीय प्रयास को लेकर लोगों ने काफी साथ दिया। 85 वर्षीय दक्षिण भारतीय ब्राह्मण चलपती राव, जो पूजा अपार्टमेंट में अकेले रहते थे उनका 23 अक्टूबर को निधन हो गया। उनका कोई परिजन या संतान यहां न होने के कारण अपार्टमेंट के लोगों ने आपसी सहयोग से उनकी अंतिम विदाई का जिम्मा उठाया। यह बहुत ही दुखद बात सामने आई कि एक 85 वर्षीय बुजुर्ग अकेला रहता था, वहीँ इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिन्दा है।

मोहल्ले के रहवासियों ने मिलकर चलपती राव का अंतिम संस्कार भारतीय नगर स्थित मुक्तिधाम में हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार किया। प्रमुख योगदान देने वालों में अभिजीत मित्रा (रिंकू), शैलेश मिश्रा और मनीष गुप्ता का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सभी ने मिलकर उनकी अस्थियों का विसर्जन भी शिवरीनारायण में महानदी के तट पर किया, जिससे यह आयोजन मानवीयता और सामूहिक सहयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। जिसने भी इस प्रयास की सुना उसने इसकी प्रशंसा जरुर की।

माँ काली का धूम मचाने वाला बेहतरीन गीत : https://www.youtube.com/watch?v=ts6cT1FTauM

इस घटना ने समाज में सहयोग और सद्भाव की भावना को फिर से उजागर किया है, जहां मोहल्लेवासियों ने साबित किया कि इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा होता है। चलपती राव की अंतिम यात्रा में सामूहिक सहयोग की भावना ने पूरे क्षेत्र को प्रेरणा दी और एकजुटता की मिसाल पेश की। यूँही बचपन में नहीं पढ़ाया गया कि आपका रिश्तेदार तो देर से पहुंचेगा लेकिन आपका पड़ोसी पहले आपका साथ देने खड़ा होगा।