इंदौर (म.प्र) : दो साल पहले इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में अनिल दीक्षित हत्याकांड का मामला सामने आया था। जिसको लेकर बीते महीने कंडिलपुरा की रहने वाली महिला ने जिंसी डिपो के पास रहने वाले रोहन सागर और कृष्णबाग कॉलोनी के रहने वाले बिट्टू गौड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। घटना में इन पर आरोप था कि इन्होंने धमकी दी है। इस चर्चित अनिल दीक्षित हत्याकांड के गवाह को धमकाने वाला दूसरा आरोपी भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपी बिट्टू गौड़ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि गिरफ्तारी से बचने के प्रयास में उसने मकान की बालकनी से कूदकर अपना एक पैर फ्रैक्चर करवा लिया है। इसकी गिरफ्तारी पर 50 पैसे का इनाम घोषित किया गया था। वह प्रेमिका के घर में फरारी काट रहा था।
उसने पुलिसकर्मियों को चकमा देने के लिए दूसरी मंजिल की खिड़की से छलांग लगा दी थी। डीसीपी जोन-1 विनोद कुमार मीना के मुताबिक आरोपित सौरभ उर्फ बिट्टू पुत्र सुभाष गौड़ निवासी कृष्णबाग कालोनी (एरोड्रम) है। आरोपी ने दो वर्ष पूर्व मल्हारगंज थाना क्षेत्र के गुंडे अनिल दीक्षित की न्यायनगर (हीरानगर) में गोली मारकर हत्या कर दी थी। जमानत पर छूटने के बाद आरोपी गवाहों को समझौता करने के लिए धमका रहा था। पुलिस ने गवाह विक्की की शिकायत पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की और गिरफ्तारी पर 50 पैसे का इनाम घोषित कर जगह-जगह पोस्टर लगवाए थे।
खिड़की से नीचे छलांग लगा दी :
मंगलवार रात को पुलिस ने गांधीनगर क्षेत्र में समर्थ ड्रीम कॉलोनी में एक पुलिसकर्मी के घर में दबिश देकर बिट्टू को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में सामने आया है कि सराफा थाना में पदस्थ पुलिसकर्मी ने उक्त मकान युवक-युवतियों को किराये पर दे रखा था। टीआई शिव रघुवंशी के मुताबिक उसका दायां पैर टूट गया। पुलिस फरारी में मदद करने वालों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस युवती से भी पूछताछ कर रही है। टीआई के मुताबिक बिट्टू पर हत्या, धमकी सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
ईनाम बांटने पर फंसा पेंच :
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गुंडे को पकड़ने पर 50 पैसे का इनाम रखा हुआ था, ऐसे में जिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ा है, उनके बीच ईनाम की राशि कैसे बटेगी इस पर पेंच फंस गया है। दरअसल पहले पुलिस बदमाशों पर बड़ा ईनाम रखती थी तो वे रंगदारी करने लगते थे। ऐसे में इस बार पुलिस ने बदमाश पर मात्र 50 पैसे का इनाम रखा था। अब ऐसे में ईनाम की राशि को लेकर दुविधा खड़ी हो गई। ईनाम का उद्देश्य अपराधियों को अठन्नी छाप घोषित करने का था, उसी आधार पर यह राशि घोषित की गई थी।



