“मृत्यु भोज कई गुना बड़ा पाप” : इन्दू गोधवानी (मेहमान सम्पादक)

सम्पादकीय : मृत्यु भोज समाज के लिए एक अभिशाप है, दुनिया का कोई भी धर्म शास्त्र यह नहीं कहता है, कि मृत्यु पर भोज देना चाहिये धर्म ग्रंथों में भी इसका उल्लेख कहीं नही मिलता है। मृत्यु भोज करना मुर्दा खाने से भी बड़ा पाप है। मृत्यु भोज करवाने से तो बेहतर है भिक्षुओं को भोजन खिला देना चाहिए।

अनावश्यक खर्च : मृत्यु भोज अक्सर बहुत महंगा होता है, जो मृत व्यक्ति के परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ भी हो सकता है। कई लोग अपने माता पिता की जायदाद बेच कर माता पिता के श्राद्ध करते हैं और वह गरीब परिवार बर्बाद हो जाता है।

अनुचित समय : मृत्यु भोज अक्सर मृत व्यक्ति के परिवार और मित्रों के लिए एक कठिन समय होता है, जब वे शोक और दुःख में डूबे होते हैं।

मृत्यु भोज है अनुचित:

किसी भी धर्म शास्त्र में कही भी मृत्यु भोज का प्रसंग नहीं आया है। इसलिए यह प्रथा पूर्णरुपेण अनुचित है और इस प्रथा को हमेशा के लिये बन्द कर देना चाहिए। जो व्यक्ति गम में डूबा हो दुखी हो उससे हम मिठाईयां खाते है यह सर्वथा अनुपयुक्त कार्य है। कोई व्यक्त़ि और उसका परिवार शोकाकुल है, यानि हमें इसकी कितनी खुशी है कि वह कितना मूर्ख बन रहा है कि उस व्यक्त़ि के पिताजी तो परलोक सिधार गये और वह हंसी से मिठाईयां बंटवा रहा है। धार्मिक और सांस्कृतिक अनुचितता: मृत्यु भोज कुछ परंपराओं में अनुचित माना जा सकता है, जहां मृत्यु को एक गंभीर और शोकपूर्ण अवसर माना जाता है।

देखो हमारी भी मूर्खता है कि यानि हम भी यह चाह रहे है कि अच्छा हुआ कि हमारे परिवार का कोई सदस्य स्वर्ग सिधार गये, हम ऊपरी तौर पर भले ही यह कहें कि हमारे परिवार के सदस्य मुझे बहुत प्यारे थे। इसलिए हम दस गावों की पंगत करेगे‌।
हमारे मन-मस्तिष्क के अंदर ही अंदर हमारे परिवार का कोई शत्रु जो परिवार के सदस्य के परलोक सिधारने पर मिठाईयां बांट रहा है। किसी के निधन पर भला मिठाईयां कौन बांटता है, मित्र या शत्रु..? डाकुओं के मर जाने पर तो गांव मे मिठाईयां बंटती है क्योंकि ड़ाकू हमारा पूरे गांव और समाज का शत्रु है। लेकिन परिवार के किसी सदस्य के निधन के बाद मिठाईयां खिलाना तो निश्च़ित रुप से शत्रुता का ही प्रतीक है, यह कृत्य कहीं से भी मित्रता का प्रतीक नही है। और अपने हाथों से मिठाईयां बांटना तो बिल्कुल भी ठीक नहीं है, आजकल लोग नये-नये नियम निकालते है और शोकाकुल परिवार से ही मिठाईयां बंटवाई जाती है जो कि सर्वथा अनुचित है।

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महत्वपूर्ण यह है कि हम मृत व्यक्ति के सम्मान में और दिवंगत की आत्मा की शांति तथा उनके परिवार और मित्रों के लिए एक संवेदनशील तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित करें।
संकलन एवं साभार प्रस्तुति :-
: इन्दू गोधवानी..रायपुर.. 9425514255