लखनऊ (उ.प्र.) : एक डायलॉग है फिल्म धुरंधर में भारत के अंदरूनी दुश्मन तो पहले नंबर है, पाकिस्तान तो फिर भी दूसरे नम्बर पर है। मामला है उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने हजारों की संख्या में फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड प्रमोद कुमार निषाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। 28 वर्षीय प्रमोद निषाद बहराईच जिले का रहने वाला है। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी प्रमोद ने अब तक 18 से 19 हजार आधार कार्ड अपडेट किये या बनाये हैं। उसके पास से 2 अदद मोबाईल फोन, 1 लैपटाप, 2 एटीएम कार्ड, 1 आधार कार्ड, 1 चेक बुक, 1 बायोमैट्रिक स्कैनर, 1 रेटिना स्कैनर, 1 वेबकैम, 87 वर्क मोबाईल फोन से लिए गए स्क्रीन शाट और अन्य दस्तावेजों की छाया प्रति, कार और 2680 रुपये नकद बरामद हुए हैं। प्रमोद द्वारा लम्बे समय से इस घिनौने कार्य को अंजाम दिया जा रहा था।
दरअसल, एसटीएफ ने शुक्रवार को पोर्टल के जरिए कूटरचित जन्म-निवास प्रमाण पत्र बनाकर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा कर दिया है। ये गिरोह बहराइच-नेपाल बार्डर के आसपास लंबे समय से सक्रिय था। एसटीएफ ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी प्रमोद निषाद पढ़ा-लिखा था। उसने जनसेवा केंद्र की आड़ में हजारों लोगों की पहचान बदलने का खतरनाक खेल खेला है। इससे राष्ट्र को अंदरूनी खतरा होने से नकारा नहीं जा सकता।
बहराइच जिले का रहने वाला है प्रमोद :
युवक के बारे में जानकारी सामने आई है कि 28 वर्षीय प्रमोद निषाद मूल रूप से बहराईच जिले के थाना मुर्तिहा क्षेत्र के ग्राम सेमरी मलमला का निवासी है। उसने बीएससी तक पढ़ाई की है और शुरुआत में वह आम युवाओं की तरह सरकारी योजनाओं से जुड़े ऑनलाईन कार्य सीख रहा था। साल 2021 में उसने जनसेवा केंद्र पर ऑनलाईन आवेदन भरने का काम सीखा और फिर लाइसेंस लेकर निषाद कंप्यूटर केंद्र के नाम से जनसेवा केंद्र खोल लिया था। जिसकी आड़ में उसने ये सब काम शुरू कर दिये।
पहले काम सीखा, फिर मास्टरमाइंड बन गया :
जनसेवा केंद्र के जरिए सरकारी पोर्टलों की जानकारी रखने वाला प्रमोद धीरे-धीरे डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों को समझने लगा था। साल 2024 के अंत में टेलीग्राम के माध्यम से अकील सैफी नामक व्यक्ति से उसका संपर्क हुआ था। यहीं से प्रमोद अपराध की दुनिया में पूरी तरह सक्रिय हो गया था। अकील सैफी ने उसे कूटरचित जन्म और निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले पोर्टल के साथ-साथ आधार कार्ड बनाने की यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए 35,000 रुपये की कीमत तय हुई थी, जो अकील को जाती थी।
0 से 18 साल तक बच्चों का आधार कार्ड बना डाला :
इसके साथ ही, आईडी और पासवर्ड मिलने के बाद प्रमोद ने अपने सिस्टम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का पोर्टल, फर्जी निवास प्रमाण पत्र का सॉफ्टवेयर, आधार नामांकन और संशोधन से जुड़े टूल इंस्टॉल कर लिए थे। इसके बाद डिजिटल फर्जीवाड़े का संगठित खेल शुरू किया था। प्रमोद सिर्फ 1-2 मिनट में कूटरचित डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार कर लेता था, जिनके आधार पर नए फर्जी आधार कार्ड बनते थे। मौजूदा आधार में नाम, जन्मतिथि और पता बदला जाता था। 0 से 18 साल के बच्चों तक निशाने पर थे। वह लगातार फर्जी आधार और दस्तावेज बनाने लगा।
हर आईडी के बदले 45 हजार रुपये लेता था :
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि प्रमोद 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के भी आधार कार्ड बना रहा था। यह काम वह उन लोगों के लिए करता , था जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था, अमूमन मानकर चलो की अवैध प्रवासी जो भारतीय नागरिक नहीं है, क्यूंकि भारतीय नागरिक के पास कोई दस्तावेज ना हो ऐसा नहीं हो सकता। प्रमोद यहीं नहीं रुका, उसने दर्जनों लोगों को AnyDesk के जरिए सिस्टम एक्सेस दे दिया था। उनके कंप्यूटर में फर्जी पोर्टल इंस्टॉल किये गये थे। हर यूजर आईडी के बदले वह 45,000 रुपये लेता था। इसमें से 35,000 रुपये अकील सैफी को और बाकी रकम प्रमोद खुद रख लेता था। एक आईडी से रोजाना औसतन 20 से 25 आधार कार्ड बनाये जाते थे। यह रकम लाखों में होती थी।
12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया :
मामले की पूछताछ में प्रमोद ने स्वीकार किया है कि उसके नेटवर्क के जरिए 18 से 19 हजार फर्जी आधार कार्ड बनाए या संशोधित किए हैं। नेपाल सीमा क्षेत्र में यह रैकेट तेजी से फैल रहा था। यही नहीं, वो गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। वो नेपाल भी भागने की तैयारी में था। एसटीएफ को पुख्ता सूचना मिली कि प्रमोद नेपाल फरार होने की योजना बना रहा है। लेकिन वह पकड़ में आ गया और यह चौंकाने वाला मामला खुल गया।



