रायपुर : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने की वजह से डायरिया और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीँ शहर के भगिरथपुरा प्राइमरी हेल्थ सेंटर में दस्त और उल्टी के 38 नए मरीज सामने आये है। वहीँ स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक इस घटना में 7 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बीमारी से अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। वाहन इस घटना से इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बाद प्रदेश में भी पेयजल आपूर्ति को लेकर शासन सचेत हो गया है। सभी नगरीय निकायों को पेयजल की जांच करने निर्देश दिए गए हैं।
वहीँ रायपुर नगरीय प्रशासन विभाग को करीब पांच माह पहले 14 नगर निगमों के 147 वार्डों में दूषित पानी की शिकायत मिली थीं। शासन ने कार्ययोजना तैयार कर शिकायतों को दूर करने के निर्देश दिए थे। इंदौर की घटना को देखते हुए शासन ने निकायों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैं। अब विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के सभी 192 नगरीय निकायों से उन क्षेत्रों का डेटा मांगा गया था, जहां गर्मी के दिनों में पाईपलाईन सूख जाती है या पानी दूषित आता है। रायपुर के 21, बिलासपुर के आठ, चरोदा के 14, रिसाली के 13, भिलाई के 23 और दुर्ग के पांच वार्डों में दूषित पानी की शिकायत मिली थी। इन क्षेत्रों में करीब 208.57 किमी लंबी पाइपलाइन के विस्तार और सुधार का लक्ष्य रखा गया था। शासन ने इसे दिसंबर 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया था। वहीँ ऐसी घटनायें राज्य में ना हो इसके लिए शासन मुस्तैद हो गया है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं :
इधर निकायों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पिछले एक दशक में करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 500 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट अभी भी चल रहे हैं। लेकिन, रियल टाइम मानिटरिंग की व्यवस्था नहीं होने से यह पता नहीं चलता है कि पानी अंतिम छोर तक पहुंच रहा है कि नहीं, वहीँ अमृत जल योजना का हालात भी खराब है।
पाईपलाईन में लीकेज की जानकारी भी समय पर नहीं मिलती, जिससे नालियों का गंदा पानी पाईपलाईन के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। ऐसे में अधिकारियों का दावा है कि पेयजल की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता। इसके साथ ही जल की आपूर्ति से पहले और बाद में तीन स्तरों पर जांच की जाती है। इसमें स्रोत स्तर, टंकी स्तर और वितरण स्तर पर पानी की नियमित जांच शामिल है।
इंदौर की घटना के बाद शासन ने फिर मांगी रिपोर्ट :
वहीँ अब इंदौर की घटना से शासन आवश्यक कार्यवाही में जुट गया है, पुलक भट्टाचार्य, अपर संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग ने कहा कि सभी निकायों को पेयजल जांच के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने बताया है कि तीन स्तरों पर जांच की जाती है। बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग समेत बड़े शहरों और नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति सिस्टम को बेहतर करने स्काडा तकनीक अपनाने के लिए कहा गया है। इससे पाईपलाईन में लीकेज या पाइप फटने का तुरंत पता चल जाता है। इसके साथ ही पानी को गुणवत्ता को लेकर सावधानी भी बरती जा रही है।



