नीमच (म.प्र.) : मधुमक्खियों का काटना बेहद घातक होता है, ऐसे में कोई भी मधुमक्खियों से बचकर ही रहता है, लेकिन कई बार ये खौफनाक रूप भी ले लेती है। वहीँ सामने आया मामला है मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में मानवता और ममता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसे सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई। मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र पर जब अचानक मधुमक्खियों के खूंखार झुंड ने हमला किया, तो वहां मौजूद कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मौत से मुकाबला किया। घटना के समय परिसर में खेल रहे मासूम बच्चों पर अचानक मधुमक्खियां झपटीं, कंचन बाई उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ीं। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को तिरपाल और दरी से ढंका और एक-एक करके करीब 20 बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर पहुंचाया।
वहीँ मासूमों को मौत के मुंह से निकालने के इस प्रयास में हजारों मधुमक्खियों ने कंचन बाई को अपना निशाना बना लिया और उन पर टूट पड़ीं उन्हें कई जगहों पर भयानक रूप से काटा, उनकी हालात काफी गंभीर हो गई। वहां आसपास के लोगों ने जब तक कंचन बाई को बचाने का प्रयास किया, तब तक वे बुरी तरह घायल हो चुकी थीं। सूचना पर पहुंची डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर ने उन्हें तत्काल सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार कंचन बाई न केवल आंगनवाड़ी में मध्यान भोजन बनाती थीं, बल्कि जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में गांव की सक्रिय महिला भी थीं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि उनके पति शिवलाल पहले से ही पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अब एक बेटे व दो बेटियों के सिर से मां का साया भी उठ गया है, उनकी माली हालात ठीक नहीं है।
इस घटना के बाद से पूरे रानपुर गांव में मातम के साथ-साथ भारी दहशत व्याप्त है। आलम यह है कि गांव में पानी भरने का एकमात्र स्रोत वह हैण्डपम्प है जो आंगनवाड़ी के पास लगा हुआ है, लेकिन मधुमक्खियों के उसी पेड़ पर जमे होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण अब प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब इन छत्तों को हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया जायेगा। आगे भी ऐसी घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।



