श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव में भागवत कथा का नियमित आयोजन।

बिलासपुर : श्री झूलेलाल वेलफेयर सोसाइटी बिलासपुर के द्वारा लगातार 18 वे वर्ष श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव” भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. गोल बाजार स्थित श्री मोटूमल भीमनानी ( सेवा सदन) धर्मशाला मे महोत्सव के दौरान श्रद्धालु श्रीमद भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं। श्री झूलेलाल वेलफेयर सोसाइटी के प्रमुख सलाहकार रूपचंद डोडवानी ने बताया कि….. श्री झूलेलाल महोत्सव में चकरभाटा बाबा श्रीआनंदराम दरबार के श्रद्धेय श्री बलराम भैया (एकादशी वाले)के द्वार सात दिवसीय संगीतमय सरल सिंधी भाषा में श्री भागवत कथा प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से संध्या 6:30 बजे तक सुना रहे है. भारी संख्या में भक्तजन कथा का श्रवण कर रहे हैं। बुधवार पांचवे दिन कथा वाचक श्रद्धेय श्री बलराम भैया के द्वारा सरल सिंधी भाषा में संगीतमय भागवत कथा में भगवान की प्यारी प्यारी बाल लीलाएं बताई।

जिसमें एक गोपी भगवान श्री कृष्ण को बांधती है वह ठीक से नहीं बांध पाती तब श्री भगवान कहते हैं अरि मौसी मैं सिखाऊ कैसे बांधा जाता है कहकर श्री कृष्ण ने अपनी जगह गोपी को खड़ा कर 17 चक्कर लगाकर गठान बांधी। गोपी ने कहा वाह बहुत अच्छा बांधा अब मुझे खोल तो मैं तुमको बांधू! अब कन्हैया खी खी करके हंसने लगे और कहने लगे,,,”अरी मौसी मोहे तो बांधबो ही आवे है,खोलबो तो मोपे आवे ही नां!!” अर्थात मुझे तो बांधना ही आता है खोलना तो मुझे आता ही नहीं!! उनके मुंह पर अच्छी तरह माखन मल के दूध दही से नहला के भगवान चले गए। शाम को जब उनके पति आए तो पहले तो भूतनी समझ के डर गए फिर जब पता चला तो बोल,,,”पगली तू भगवान को बांधने चली थी, वह कन्हैया इस रस्सी से नहीं वह तो प्रेम की रस्सी से ही बांधे जा सकते हैं।” कथा में उपस्थित भक्तों ने इस तरह की बहुत सारी प्रेम भक्ति से भरी भगवान की लीलाओं का श्रवण किया जिससे सभी का हृदय आनंदित हो उठा।

तभी तो कहते हैं,,, नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की!! कथा के बाद सभी ने भोजन प्रसाद पाया। श्री डोडवानी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि…. चालीहा महोत्सव के दौरान कई श्रद्धालु भक्तों के द्वारा उपवास की परंपरा का भी पालन किया जाता है जिसमें वे श्रद्धालु 40 दिन 21 दिन 11 दिन या 5 दिन का भी उपवास करते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त जितने दिन का उपवास रखते हैं वह चालिहा महोत्सव के समापन दिवस पर उतने दीप जलाकर नदी सरोवर में प्रवाहित कर अपने उपवास का परायण करते हैं।

चालीहा महोत्सव में सोसायटी के अध्यक्ष जगदीश हरदवानी , रूपचंद डोडवानी,प्रीतमदास नागदेव,, मुरली मलघानी, फेरू आडवाणी ,नानक नागदेव, राजकुमार मनचंदा , इंदर गंगवानी , सेवक वाधवानी,विजय हरियानी, प्रकाश आडवानी, किशन चंद रामानी,घनश्याम दास गिदवानी भगवान दास विधानी, आनंद देसर, नरेंद्र मूलचंदानी, जगदीश जज्ञासी, ओम जीवनानी भाई प्रताप राय वाधवानी, विजय हरियानी,‌ ,उत्तम बोदवानी,विजय दुसेजा, अनिल मलघानी,, महिला विंग से सरिता डोडवानी, लता हरदवानी , कृपा सिदारा, कंचन रोहरा, ट्विंकल आडवानी,दिव्या चावला, ज्योति हरियानी, प्रिया नत्थानी, रेशमा मिरानी, निकिता डोडवानी,कीर्ति सिरवानी, पलक डोडवानी, कौशल्या जगवानी, प्रिया जगवानी,बबीता मलघानी,सहित समाज के सैकड़ों की संख्या में गणमान्य वरिष्ठ जन एवं महिलाएं उपस्थित थे।