रक्षाबंधन पर भाजपा की दूसरी लिस्ट की हो सकती है घोषणा, चुनावी गणित कुछ और कहता है, भावनात्मक तौर पर कुछ और बातें है, ये रहेगा गुणा भाग….।

रायपुर : भाजपा की पहली सूची में अधिकतर नये नाम थे, अब आने वाली दूसरी सूची पर लोगों की निगाहें है, अब आगे किसके नाम तय होंगे या हो सकते है, यह अगली सूची की घोषणा ही बतायेगी , फिर भी लोगों के कई कयास और नेताओं कि दावेदारी की बातें लगातार चल रही है, आइये जानते है, आगे का क्या है गुणाभाग?

छत्तीसगढ़ भाजपा ने 21 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर पहले ही सबको चौंका दिया था। अब इसी महीने दूसरी सूची भी जारी करने की पूरी उम्मीद है। इसमें 28 से 30 नाम हो सकते हैं। ये सभी वो सीटें होंगी, जिनमें पिछली बार पार्टी को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। संभावना है कि रक्षा बंधन और उसके आसपास नामों का ऐलान किया जा सकता है। इन नामों को लेकर लोगों में लगातार उत्सुकता है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार को चुनाव समिति की हुई थी बैठक में बाकी सीटों पर नामों को लेकर मंथन किया गया था। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने कहा था कि जल्दी ही दूसरी सूची भी आएगी। भाजपा ने पहले ऐसे 54 नामों को छांटा था, जहां पिछली बार बड़ी हार मिली थी। इन्हीं सीटों पर पहले प्रत्याशी घोषित किए जा रहे हैं। इसी फार्मूले के तहत पहले 21 सीटें घोषित की गई हैं। अब आगे कौन सी सीटों पर घोषणा होगी यह देखना भी दिलचस्प होगा।

जिन्होंने दल बदला उन्हें टिकट मिलना तय :

ये तय माना जा रहा है कि जिन लोगों को वर्तमान में पार्टी में शामिल कराया गया है, उन्हें टिकट जरुर मिलेगा। IAS नीलकंठ टेकाम भी उनमें शामिल हैं। पार्टी उन्हें केशकाल से चुनाव लड़ा सकती है। इसी तरह सीतापुर में सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ सदस्यता लेने वाले अनिल निराला को टिकट मिलने की पूरी संभावना है। सतनामी समाज के धर्म गुरु बालदास अपने पुत्र खुशवंत दास के लिए आरंग से टिकट मांग रहे हैं और पार्टी उन्हें टिकट दे भी सकती है। ये सब रणनीति आमतौर पर जाती आधारित बनाई जाती है।

क्या धर्मगुरु के बेटे के भाजपा प्रवेश से बदल सकते है समीकरण

रायपुर उत्तर विधानसभा में पार्टी सिंधी समाज के सदस्य को टिकट देने के मूड में दिख रही है। इसके लिए कई नाम आगे चल रहे हैं। आइये इनका विश्लेषण करते है चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अमर पारवानी का नाम प्रमुख है, जबकि वे भाजपा से चुनाव नहीं लड़ना चाहते है, फिर भी उनके चाहने वाले उनके नाम की चर्चा करते है। लिहाजा पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी फिर से कतार में हैं, लेकिन पिछली हार के कारण इनकी टिकट कटना भी लगभग तय है, ये फिर भी टिकट की जुगत में पिछले चैम्बर चुनाव से लगे हुये है। इनके साथ ही भाजपा के मीडिया प्रभारी अमित चिमनानी और ललित जयसिंह भी सक्रिय हैं, इनको भी पार्टी के स्तर पर और मानदंडों पर टिकट मिलना मुश्किल ही है। बावजूद इनके जो सबसे मजबूत नाम सिंधी समाज की तरफ से चर्चा में है, वो शदाणी दरबार के प्रमुख युधिष्ठिर लाल के बेटे उदय शदाणी का है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उदय शादाणी चुनाव लड़ते हैं, तो सिंधी समाज एक होकर चुनाव लड़ेगा, नहीं तो वोट बंटेंगे, लेकिन दूसरी तरफ उदय शदाणी गैर राजनैतिक चेहरा है, इसलिये इनको भी टिकट मिलना काफी हद तक मुश्किल ही है, उत्तर विधानसभा में सिंधी समाज की दावेदारी को देखते हुए संजय श्रीवास्तव, राजीव अग्रवाल दोनों ग्रामीण की तरफ रुख कर सकते हैं। हालांकि यहां अमित साहू का नाम पहले से ही चर्चा में है।

अगर सिन्धी समाज को टिकट मिलना मुश्किल है या उपरोक्त कैंडीडेट पार्टी के मापदंडों पर नहीं है तो आखिर सिन्धी समाज के किस व्यक्ति को टिकट मिल सकता है, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, अब ये तय होगा अगली जारी होने वाली लिस्ट के आधार पर, अभी तो सिर्फ कयास चल रहे है।

अगर रायपुर उत्तर का टिकट सिंधी समाज को नहीं मिला तो क्या होगा :

बिलासपुर से अमर अग्रवाल सबसे प्रबल दावेदार हैं, जबकि ये भी बिलासपुर से मजबूत दावेदार नहीं है। 15 साल के मंत्री और 20 साल के विधायक रहे है। कहा जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें दो विकल्प दिए हैं कोटा और बिलासपुर दोनों जगह में से। लेकिन ये भी रायपुर उत्तर के समीकरण पर निर्भर करता है। दरअसल, बिलासपुर से डॉ. ललित माखीजा भी सशक्त दावेदार हैं, जो सिंधी समाज से आते हैं, ऐसी स्थिति में रायपुर उत्तर से सिन्धी समाज की टिकट कट सकती है। पार्टी का मानना है कि फिलहाल एक कैंडिडेट सिंधी समाज से देना ही है। लिहाजा अगर रायपुर उत्तर से समाज को टिकट मिलती है, तो अमर अग्रवाल बिलासपुर से ही लड़ेंगे। यदि रायपुर उत्तर से सिंधी समाज को टिकट नहीं मिलता है, तो बिलासपुर में ललित माखीजा का अवसर बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में अमर अग्रवाल से कोटा की तैयारी के लिए कहा जा सकता है। जिसके कारण रायपुर में सिन्धी समाज के दावेदारों की उम्मीद पर पानी फिर सकता है।

रायपुर दक्षिण में सिंगल नाम, पश्चिम में दिक्कत :

कहा जा रहा है कि दक्षिण में सिंगल नाम का ही पैनल है, यहां से केवल बृजमोहन अग्रवाल हैं, जबकि पश्चिम में राजेश मूणत के साथ आशू चंद्रवंशी और मीनल चौबे का भी नाम है। हालांकि एक चर्चा यह भी है कि राजेश मूणत को ग्रामीण का विकल्प भी दिया जा सकता है। जबकि भाजपा की नई रणनिति समझना बड़ा मुश्किल है, अगर उसको समझने का यत्न करें तो हारे हुये कैंडीडेट को टिकट नहीं दी जा सकेगी, और जैसे लोकसभा चुनाव में 7 बार के सांसद रमेश बैस टिकट ना देकर सुनील सोनी जैसे नये कैंडीडेट को टिकट दी गई थी, अगर ऐसा ही कुछ दक्षिण में होता है तो बृजमोहन अग्रवाल की टिकट पर भी संदेह है, केन्द्रीय नेतृत्व अब लगातार नये चेहरों ध्यान डे रहा है, उसके लिये हर हालत में यह चुनाव जितना महत्वपूर्ण है।