क्या आपकी गाड़ी भी कभी डिवाईडर से टकराई है, तो यह खबर आपके लिये है, बदहाल होती हुई राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था से परेशान आमआदमी, मंत्री भी नहीं है सुरक्षित।

राकेश डेंगवानी/रायपुर : बारिश के सीजन में रात में गाड़ी चलाना खतरे से खाली नहीं है, कई बार रात में वाहन चलाना दिक्कत दायक होता है, खासकर चौपहिया वाहन चालकों के लिये, रात के समय में ही अधिकतर दुर्घटनायें सामने आई है, अकेले रामसागर पारा राठौर चौक के आसपास के व्यापारियों ने बताया कि प्रभात टॉकीज के पास बने हुये छोटे डिवाईडर में ही बीते 5 सालों में 200 से ज्यादा गाड़ियाँ टकराकर दुर्घटना ग्रस्त हो चुकी है, यहीं हाल कुछ साल पहले पंडरी में LIC ऑफिस के पास बने डिवाईडर का था, जो बाद में सुधारा गया था। ऐसे ही कई खतरनाक डिवाईडर राजधानी कि सड़कों पर रात में नहीं दिखते और दुर्घटनायें हो जाती है, लेकिन किसी को कोई मतलब नहीं है, क्या है इसका कारण? आइये जानते है इस खबर में :

रात में वाहन चलाते समय दिक्कतें :

जब आप रात में वाहन चलाते है तो सामने से आती हुई गाड़ी की हेडलाईट की रोशनी अपर में होने के कारण आगे का रास्ता नहीं दिख पाता और वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, बारिश और ठण्ड के समय वाहन के कांच में ओस जम जाती है, जिसके कारण भी वाहन आपस में टकरा जाते है, रात में यदि यात्रा करनी हो तो वाहन की गति धीमी रखें, सीट बेल्ट जरुर बांधे। हो सके तो रात के समय यात्रा करने से परहेज करें।

वाहन का डिवाईडर से टकराना :

राजधानी में शहर के अंदर अधिकतर डिवाईडर काफी समय पहले बनाये गये थे, जो सड़क के पुनर्निर्माण के कारण अपनी ऊंचाई से छोटे हो गये है, अथवा कई जगहों पर बेतरतीब और मनमाने ढंग से अनुचित डिवाईडरों का निर्माण हो चुका है, रात में जब वाहन चालक गाड़ी चलाता है तो उसे गाड़ी में बैठे ये छोटे डिवाईडर नहीं दिख पाते, जिसके कारण वो डिवाईडर से टकरा जाता है, इन डिवाईडरों के शुरू में रेडियम का बोर्ड लगाने का नियम है, जिससे रात के समय वाहन चालक सावधान हो जाये, लेकिन अधिकतर डिवाईडर जरुरी मापदंडों पर नहीं बनाये गये है, डिवाईडर से टकराने पर वाहन चालकों की ख़बरें ना मीडिया में आती है ना ही पुलिस में शिकायत होती है, और वाहन मालिक रात को गाड़ी वहीँ छोड़कर सुबह बनवाने चला जाता है, इसी तरीके के कई घटनायें राजधानी में सामने लगातार घटित हो रही है।

दुर्घटना का शिकार होने पर लग जाती है कई बार गंभीर चोटें और गाड़ी में आ जाता है हजारों रुपये का खर्च :

अगर किसी का वाहन डिवाईडर से टकरा जाता है तो, सबसे पहले उस गाड़ी के टकराने से अन्दर बैठे लोगों को झटके और चोटें लग जाती है, जो किसी के हाथ में जोर का झटका लगता है, स्टेयरिंग पर ड्राईवर का जबड़ा टकराने पर वहां की हड्डी को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है, गाड़ी की छत से किसी का सर टकरा जाता है, टक्कर जितनी जोरदार होती है, शरीर को उतनी जोर का झटका लगता है, ऐसी दशा में हड्डी फ्रेक्चर होने का भी डर रहता है, ऊपर से गाड़ी आगे से टकराती है, जिसके कारण गाड़ी का चेचिस ख़राब होता है और तुरंत इंजन काम करना बंद कर देता है, जिसके कारण आप गाड़ी आगे नहीं ले जा पाते और आपको गाड़ी वहीँ छोड़कर निकलना पड़ता है, उसके बाद बनवाने का खर्च नुकसान के आधार पर 10,000 से 50,000 रूपये वाहन के हिसाब से आम आदमी को वहन करना पड़ता है, इस नुकसान का जिम्मेदार कौन?

राजधानी की सड़कें संकरी हो गई है और लगभग सभी सड़कें खुदी हुई है :

राजधानी में बीते पांच वर्ष से जितनी भी सड़कों का चौड़ीकरण तय था, उन पर अभी तक कोई काम नहीं हो पाया है, जिसमें मुख्यरूप से सिटी कोतवाली से संतोषी नगर चौक, तात्यापारा से शारदा चौक है तथा अन्य कई सड़कों को भी चौड़ा करना आवश्यक हो गया है, कारण है कि बाहर से कई लोग राजधानी में व्यापार के लिये आ रहे है, जिससे जनसँख्या के साथ वाहन चालक बढ़ रहे है, सुबह के समय सभी नौकरी पेशा और व्यापारी अपने काम पर जाते है तो चौक चौराहों पर रोज जाम लगने की समस्या बढ़ गई है, ऊपर से जल्द बाजी के कारण लोग जबरिया हॉर्न बजाते है, जिससे ट्रेफिक पुलिस वाले ध्वनि प्रदुषण के कारण हाई बीपी के शिकार हो रहे है, लगातार सडकों पर आपस में वाहन टकराने की संख्या बढ़ गई है, वाहन टकराने के बाद लोगों की आपस लड़ाईयां भी हो जाती है, अकेला व्यक्ति भी सड़क पर कार में निकलता है। जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

राजधानी में इस समय बारिश के कारण कई सड़कें ख़राब हो गई हो गई जिनका मेंटेनेंस बारिश के पहले करना था, लेकिन ये सब बारिश शुरू होने के बाद ही निगम जागा और ख़राब मेंटेनेंस के कारण सड़कों में दो – दो फीट के गड्ढे बन गये है, जो दुर्घटना को लगातार आमंत्रण दे रहे है, ऊपर से अव्यवस्थित तरीके से नल की पाईपलाईन बिछाने के के कारण पूरे शहर की सड़कें खुदी हुई है, अब इधर गढ्ढा और उधर डिवाईडर, तो वाहन चालक के साथ तो दुर्घटना होकर ही रहेगी।

कॉलोनियों के अन्दर भी होती है दुर्घटनायें लेकिन आप तक नहीं पहुंचती :

कॉलोनियों में लोग घर तो बना लेते है लेकिन कार के लिये पार्किंग नहीं बनाते, और अपनी कार घर के बाहर खड़ी कर देते है, इन कॉलोनियों में जो किरायेदार रहते है उनके पास भी यही हाल है, रहने को घर नहीं लेकिन कार जरुरी है, क्यूंकि 50,000 – 70,000 रूपये में पुरानी गाड़ियाँ मिल जाती है। कॉलोनियों में रहवास क्षेत्र के हिसाब से सड़कें कम चौड़ी होती है, और जब आप उन सड़कों से अपनी गाड़ी बचाते हुये निकालते है तो आपकी गाड़ी उन गाड़ियों से टकरा जाती है, कॉर्नर में बने मकानों पर दुपहिया वाहन चालक भी गाड़ी मोड़ते हुये इन कारों से टकरा जाते है, ऊपर से कॉलोनियों में व्यापारिक गतिविधि जैसे छोटे अस्पताल , होटल आदि भी रोड को संकरा करने में कोई कमी नहीं करते है।

कुछ घटनायें आपके सामने है :

इसी वर्ष 20 अप्रैल माना थाना क्षेत्र में बुधवार-गुरुवार दरमियानी तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा गई। सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकी चार घायल हो गए। घायलों में एक की हालत गंभीर थी।

29 जुलाई राजधानी के धनेली-धुसेरा मार्ग में एक शख्स कार के अंदर जिन्दा जल गया। सुबह जली हुई कार देख लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। हादसे में मृतक की पहचान चंद्रशेखर सिंह निवासी शदाणी दरबार के रूप में हुई हैं। बताया गया कि युवक पेशे से ट्रांसपोर्टर थे। जो वाहन क्रमांक सीजी 04 एमएल 9966 से देर रात घर लौट रहे थे।

25 जनवरी राजधानी के हृदय स्थल जयस्तंभ चौक पर बड़ा हादसा, बारातियों से भरी बस डिवाइडर से टकराई, 15 लोग घायल।

3 फरवरी छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री की गाड़ी डिवाईडर से टकराई थी, जिसके बाद हादसे में टीएस सिंहदेव बाल-बाल बचे थे। जब सुरक्षा में चल रही गाड़ी टकरा सकती है, तो आम आदमी क्या चीज है?

16 फरवरी 2022 रायपुर में एक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर बुधवार को सुबह एक एसयूवी (SUV) डिवाइडर से टकरा गई, जिससे उसमें सवार छह महिलाओं की मौत हो गई और चालक समेत पांच अन्य लोग घायल हो गए। कार में सवार लोग दुर्ग जिले के रहने वाले थे और माघ मेले में शामिल होने के लिए गरियाबंद जिले के राजिम जा रहे थे।

इन घटनाओं के अलावा भी सैकड़ों घटनायें होती है जो मीडिया में आपके सामने नहीं आ पाती है।

क्या है बदलाव की आवश्यकता ?

  1. सभी सड़कों के आवश्यक चौड़ी करण समय पर करवायें जायें।
  2. डिवाईडर के शुरू और अंत में रेडियम के बोर्ड लगवाने की व्यवस्था हो।
  3. जो डिवाईडर छोटे हो गये है, उनको ठीक करवाया जाये।
  4. वाहन को सावधानी पूर्वक धीमी रफ़्तार से चलाने के लिये लोगों को जागरूक करें।
  5. बारिश में अथवा रात के समय वाहन सावधानी से समझदारी पूर्वक चलायें।
  6. सड़कों के आस पास बने गड्ढों को जल्द बंद किया जाये।
  7. सर्विस रोड में खड़ी गाड़ियों को हटवाया जाये।
  8. सड़क किनारे गाड़ी बनाने वाले गैरेज और धुलाई सेंटर को हटवाया जाये।
  9. रात में किसी क्षेत्र की स्ट्रीट लाईट बंद हो तो सुधरवाया जाये, अथवा जो भी आवश्यक हो वो उपाय किये।

उपरोक्त के अलावा एक आम आदमी का दायित्व भी समझें आपके आस-पास ऐसा ही कुछ हो रहा हो तो, आप खुद भी रेडियम लगवाकर इंतजाम करें, अथवा सम्बंधित क्षेत्र के पार्षद से कहें की उस समस्या का समाधान करें। आपके छोटे से प्रयास किसी की जान बचा सकते है