मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बनाई 4 मंत्रियों की समिति, अब ये विधायकों को आवंटित करेंगे सरकारी आवास जाने आगे की खबर।

भोपाल (म. प्र.): विधायकों को भोपाल में सरकारी आवास अब मंत्री समिति की अनुंशसा पर ही मिलेंगे। इसके लिए सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाई है। यह समिति आवास की आवश्यकता का आकलन करके अनुशंसा करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री डॅा. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। अभी आवास आवंटन के लिए विधायक सीधे मुख्यमंत्री के पास पहुंचते थे। प्रदेश के 230 विधायकों में से मंत्रियों के आवास को छोड़ दिया जाए तो बड़ी संख्या में विधायक विश्रामगृह में रहते हैं।

यहां पारिवारिक खंड के साथ तीन मंजिला भवन में आवास हैं। यहां 320 विधायकों (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ मिलाकर) के हिसाब से व्यवस्था बनाई गई थी। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद रिक्त आवास आवश्यकतानुसार विधायकों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं लेकिन जो विधायक यहां नहीं रहना चाहते हैं उन्हें या तो विधानसभा पूल के सरकारी आवास अध्यक्ष द्वारा आवंटित कर दिए जाते हैं या फिर मुख्यमंत्री अपने विवेकाधीन कोटे से आवास दे देते हैं।

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नई व्यवस्था में अब सरकार द्वारा विधायकों को भोपाल में सरकारी आवास मंत्रियों की समिति की अनुशंसा पर दिए जाएंगे। समिति में विजय शाह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद सिंह पटेल और राकेश सिंह को शामिल किया गया है। गृह विभाग के प्रमुख सचिव इसके समन्वयक होंगे। आवंटित होने के बाद भी मंत्रियों को नहीं मिले आवास- प्रदेश सरकार ने मंत्रियों को आवास तो आवंटित कर दिए पर वे अभी तक उनमें रहने नहीं पहुंच पाए हैं।

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दरअसल, जिन पूर्व मंत्रियों के आवास इन्हें आवंटित किए गए हैं, वे रिक्त ही नहीं हुए हैं। इनमें कुछ तो विधायक हैं और कुछ चुनाव हार चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के ही नेताओं से जुड़ा मामला होने के कारण आपस में सामंजस्य बनाकर व्यवस्था बनाई जा रही है। कुछ पूर्व मंत्रियों ने जल्द ही आवास रिक्त करने का आश्वासन भी दिया है। मंत्रियों को कर्मचारी भी नहीं मिले- उधर, अधिकतर मंत्रियों की निजी स्थापना में अधिकारी-कर्मचारी भी पदस्थ नहीं हुए हैं।

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सभी मंत्रियों से मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम प्रस्तावित न किए जाएं, जो लंबे समय तक मंत्री पदस्थापना में रह चुके हैं। दरअसल, कुछ मंत्रियों ने पूर्व में अपने पास रह चुके अधिकारियों-कर्मचारियों की फिर से पदस्थापना करने का अनुरोध किया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया है। हालांकि, अधिकतर मंत्रियों के यहां पूर्व मंत्रियों का स्टाफ बिना आदेश इस आशा में काम कर रहा है कि आगे-पीछे पदस्थापना हो जाएगी।

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