सड़क निर्माण को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना, वहीँ स्काईवाक को लेकर मूणत ने पूछा सवाल, मंत्री साव बोले – ऐसा होगा….।

रायपुर : स्काईवाक के निर्माण से ही राजधानी में बवाल मचा हुआ है, वहीँ 5 साल कांग्रेस की सत्ता में इसे जनता के गले की हड्डी बनाये रखा, जनता जहाँ इस निर्माण के खिलाफ थी वहीँ तत्कालीन मंत्री और वर्तमान विधायक राजेश मूणत इसके पक्ष में थे। जनता ने इस निर्माण को लेकर लगातार हमेशा अपना विरोध जताया।

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वहीँ इस बहुचर्चित स्काईवॉक मामले में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की शिकायत ईओडब्ल्यू में हुई थी। इसकी प्राथमिक जांच में आरोप अप्रमाणित पाए गए हैं। इस शिकायत को पूर्ववर्ती सरकार के समय किया गया था। इसके विधिवत समीक्षा के बाद ब्यूरो स्तर पर प्राथमिक जांच को 11 दिसम्बर 2023 को नस्तीबद्ध कर दिया गया है। यह जानकारी विधानसभा में विधायक राजेश मूणत के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दी है। दरअसल, विधायक मूणत ने स्काईवॉक निर्माण की अद्यतन स्थिति और इस संबंध में ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत की स्थिति को लेकर सवाल किया था। विधानसभा के बजट सत्र में पूछे गए प्रश्न के जवाब में उप मुख्यमंत्री व लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने लिखित में बताया कि स्काईवाक के निर्माण में भ्रष्टाचार प्रमाणित नहीं हुआ है। 

स्काईवॉक का यह है मामला :

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भाजपा शासन काल में स्काईवॉक का निर्माण शुरू हुआ था। इसकी लागत करीब 70 करोड़ थीं। इसका निर्माण 23 जनवरी 2018 तक पूरा होना था। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस सरकार ने इसका खुलकर विरोध किया था। सड़क पर आंदोलन भी हुए थे। वर्ष 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद स्काईवॉक का निर्माण 5 अप्रैल 2019 से बंद कर दिया गया था। 1 मार्च 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में की गई समीक्षा बैठक के बाद निर्माण कार्य रोका गया था। इसके उपयोग को लेकर सरकार ने सामान्य सुझाव समिति और तकनीकी सुझाव समिति का गठन भी किया था।

इसके साथ ही निर्माण में गड़बड़ी को लेकर ईओडब्ल्यू में शिकायत भी की गई थी। वहीं सामान्य सुझाव समिति की तीसरी बैठक अगस्त 2020 में हुई थी। इसमें सुझाव दिया गया था कि शास्त्री चौक पर निर्माणाधीन स्काई वाक फुट ओवर ब्रिज का शेष कार्य पूरा करने का सुझाव दिया गया था। लगभग 50 प्रतिशत भौतिक एवं वित्तीय कार्य के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार आते ही स्काईवाक प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया गया। स्काईवाक बनेगा या टूटेगा इस मामले को लेकर पूर्ववर्ती सरकार ने एक समिति का गठन किया, जिसमें सामान्य सुझाव समिति व तकनीकी समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। 20 अगस्त 2020 को सामान्य सुझाव समिति ने स्काईवाक को तोड़ना अनुचित बताया था।

विधानसभा में फिर उठा मुद्दा :

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विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को एक बार फिर कांग्रेस सरकार में हुई गड़बड़ी का मुद्दा उठा। इस बार प्रश्नकाल में विधायक अजय चंद्राकर ने तेलीबांधा चौक से वीआईपी चौक तक डिवाइडर का निर्माण और सौंदर्यीकरण का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में नगरीय निकाय अरुण साव ने गड़बड़ी की बात स्वीकार की और पूरे मामले की जांच संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में कराने की घोषणा की। साथ ही जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की बात कहीं।

विधायक चंद्राकर ने कहा, देश में पहली बार जादू से सड़क बन गई। जबकि इस सड़क से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अफ़सरों की गाड़ियां चलती है। इसके बाद भी शासन को समाचार पत्रों से पता चला कि सड़क बन रही है। वो कौन सा आदमी है, जिसके जादू का प्रभाव इधर-उधर सभी जगह है। विधायक चंद्राकर ने पूछा कि इसके लिए क्या नेशनल हाइवे से एनओसी ली गई थी। इस पर मंत्री ने बताया कि एनओसी के लिए 13 जून 2022 को नगर निगम ने नेशनल हाइवे को पत्र लिखा था। उसका जवाब भी आया था। विधायक चंद्राकर ने कहा, यह अद्भुत घटना है कि दो करोड़ 36 लाख रुपए का टेंडर 10 टुकड़ों में निकाला गया। मंत्री ने बताया कि नगर निगम रायपुर ने 26 अक्टूबर 2022 को निविदा जारी की थी।

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यह मामला जब प्रकाश में आया, तो टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। वहां काम कर रहे कर्मचारी से पूछा गया तो वो किसी का नाम नहीं बता सके। इसके बाद नगर निगम ने 9 नवम्बर को टेंडर निरस्त कर दिया। हालांकि उस रोड में डिवाइडर और सौंदर्यीकरण का काम हुआ है। इसके साथ ही मंत्री ने मामले की जांच कराने की घोषणा की। इस पर विधायक चंद्राकर ने कहा, यह काम दादागिरी और लोकधन की लूट का उदाहरण है। इस जांच में रायपुर शहर के विधायकों को भी शामिल करें, ताकि शासन का तंत्र दोबारा ऐसा नहीं करें।

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