सीता माता ने यहाँ रेत से शिवलिंग बनाकर की थी पूजा, वनवास काल में आए थे भगवान श्री राम और माता सीता।

राजिम : राजिम छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ है। इसे छत्तीसगढ़ का “प्रयाग” भी कहते हैं। यहाँ के प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु प्रतिष्ठित हैं। प्रतिवर्ष यहाँ पर माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक एक विशाल मेला लगता है।छत्‍तीसगढ़ की तीर्थनगरी राजिम में प्रवेश करते ही सड़क की चौड़ाई बढ़ जाती है। रोड के डिवाइडर में मिट्टी भरी हुई है, हरियाली लाए जाने की प्रारंभिक तैयारी होती दिख रही है। महानदी पर बने सेतु से नीचे आस्था की त्रिवेणी में मीलों तक फैले राजिम कुंभ के रंगबिरंगे शामियाने, लहराते सनातनी भगवा झंडे, जलराशि के बीच कलाकृतियां मन मोहती हैं।

सृष्टि की रचना यहीं से हुई

राजिम में प्रदेश की तीन नदियों- पैरी, सौंढुर और महानदी का संगम है। इस त्रिवेणी को पौराणिक ‘कमलक्षेत्र’ कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि की शुरुआत में भगवान विष्णु के नाभि से निकला कमल यहीं पर स्थित था और ब्रह्मा जी ने यहीं से सृष्टि की रचना की थी।

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राम ने की थी कुलदेवता की पूजा

मान्यताओं के मुताबिक त्रिवेणी पर वनवास के दौरान भगवान राम ने अपने कुलदेवता की पूजा यहां की थी। किवदंतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास पर निकले सीता, राम और लक्ष्मण ने कुछ समय लोमश ऋषि आश्रम में गुजारा था। त्रिवेणी में जिस जगह सीताजी ने रेत से शिवलिंग बनाया गया था, वहीं कुलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यहां लोमश ऋषि का आश्रम भी है।

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पंचकोशी धाम का केंद्र

राजिम के आस-पास मौजूद अन्य तीर्थों के कारण यह क्षेत्र पंचकोशी धाम का केंद्र भी है। किवदंती के अनुसार सूर्य की तेज रोशनी से चमकती कमल की पंखुड़ियां जमीन पर जहां-जहां गिरीं, उस पांच कोस के इलाके में पटेश्वरधाम, चंपेश्वर, ब्रहणेश्वर, फणेश्वर और कोपेश्वर महादेव नाम से पंचकोशी धाम बने; कुलेश्वर महादेव उनके केंद्र में (बीचोबीच) स्थित है।

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लक्ष्मण झूले के पास पहुंचते ही भजनों की सुमुधर आवाज सुनाई देती है। अलग-अलग घाटों पर पुण्य स्नान करते लोग दिखाई देते हैं। खेल- खिलौनों की दुकान लगाने वालों की वेशभूषा बताती है कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए हैं। राजीव लोचन मंदिर और महादेव मंदिर को जोड़ने वाले लक्ष्मण झूले (सेतु) से गुजरते बालक अपने पालकों से नीचे मेलेस्थल पर सजी दुकानों की ओर जाने की मनुहार करते हैं।

नीचे रेत की बोरियों से तैयार किए गए अस्थाई घाटों पर लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। गर्म हवा से भरे विशालकाय गुब्बारों में राजनेताओं की तस्वीरें से आकाश भरा हुआ है। नीचे आधुनिक शामियानों में (डोम) लगे बड़े- बड़े कूलर बाहर की गर्मी से राहत देते हैं। दूर- दराज से आए लोग पुण्य स्नान के बाद मेले में घूम-घूम कर थकते हैं तो उन्हें इन शामियानों में बिछी कुर्सियां आराम देती हैं।

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राजीव लोचन मंदिर वाले तट पर पुलिस का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करता है। यहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मेले में गुम होने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिलाते हैं। चप्पे- चप्पे में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखते हैं। अपराधियों पर निगरानी रखते हैं, विघ्न संतोषियों पर तत्काल कार्रवाई करते हैं। हर घंटे सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी मेला परिसर की साफ- सफाई में जुटे हुए हैं।हर 10 से 20 मीटर में पाइप लाइन पर ऊंचाई में लगाई गई पानी की टोंटी साफ- सुथरा पानी उपलब्ध कराती है। भक्तिन माता राजिम समिति की ओर से मेला स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन भी नियमित किया गया है। राइस मिलर्स के संगठन भी मेले में आए लोगों को भोजन देने की तैयारी में जुटे हुए हैं।