अमलीडीह में कॉलोनाईजर का कब्ज़ा, हाईकोर्ट ने माँगा जवाब, निगम के रुख पर जताई नाराजगी।

बिलासपुर : राजधानी के अमलीडीह क्षेत्र में नहर की जमीन पर कॉलोनाइजर्स के कब्जा करने के मामले में हाईकोर्ट ने शासन और नगर निगम के रुख पर नाराजगी जताई है। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने निगम के वकील से पूछा है कि कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद भी नहर से कब्जा क्यों नहीं हटाया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और निगम को शपथपत्र के साथ यह बताने कहा है कि ठेकेदार पर क्या कार्यवाही करेंगे और जो नुकसान उसने किया है, उसकी भरपाई कैसे करेंगे। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट नाराजगी जताई है।

मामले में प्रकरण के अनुसार, अमलीडीह में नहर की जमीन 2006 में रायपुर नगर निगम को सौंप दी गई थी। उस समय इस नहर की चौड़ाई 40 फीट थी। नहर के लगभग 35 फीट पर कुछ बिल्डरों ने कब्जा कर दीवार बना ली है। इससे नहर में पानी निकासी के लिए केवल 5 फीट की जगह बच गई है। इसके साथ ही अमलीडीह में एक नाले के करीब 17 हजार वर्ग फीट हिस्से को पाटकर बिल्डरों ने निर्माण कर लिया है। वहीं, नहर की ही जमीन पर निजी लोगों ने भी मकान बना लिया है। इसको लेकर निगम की कार्यवाही पर कोर्ट ने जवाब माँगा है।

सिर्फ नोटिस से क्या होगा कार्यवाही बताइए :

सावन में महत्वपूर्ण महामृत्युंजय मन्त्र, इसकी उत्पत्ति की कथा और महत्व के साथ , पूर्ण सुनना आवश्यक है : https://www.youtube.com/watch?v=L0RW9wbV1fA

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने के खिलाफ छत्तीसगढ़ अधिकार आंदोलन समिति ने कलेक्टर और नगर निगम से शिकायत की, लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की। इस पर समिति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य शासन सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। शासन की ओर से बताया गया है कि कलेक्टर ने स्वयं इस बारे में रिपोर्ट दी थी कि अवैधानिक अतिक्रमण हुआ है इसे हटाया जाए। इस पर कोर्ट ने नगर निगम के वकील से पूछा कि कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद भी बेजा कब्जा क्यों नहीं हटाया गया। वहीँ इस मामले के साथ नहर वाले रोड में तीन दिन पूर्व मंदिर को हटाने की कार्यवाही की गई थी, जिसको लेकर बवाल भी मच चुका है।