लव जिहाद : अंतरधार्मिक विवाह को लेकर हसनैन और अंकिता का विवाह गैर क़ानूनी, मामले में धर्मांतरण बताया जरुरी।

जबलपुर (म.प्र.) : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इंटर रिलीजन मैरिज पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सीहोरा के हसनैन अंसारी और इंदौर की अंकिता राठौर की 12 नवंबर को शादी थी, कोर्ट ने नियमों का हवाला देकर इस पर रोक लगा दी है। मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा, स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत ऐसे शादी के लिए धर्मांतरण जरूरी है। जबलपुर हाइकोर्ट की डिविजन बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई की। इस दौरान सभी पक्षकार कोर्ट में मौजूद रहे। एडवोकेट अशोक लालवानी ने लड़की के पिता की ओर से पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण तथ्य रखे, जिसमें यह बात सामने रखी गई। 

इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने इंदौर निवासी युवती और जबलपुर के हसनैन अंसारी की शादी से जुड़े मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जो दोनों को पुलिस सुरक्षा एवं विवाह से संबंधित था। कोर्ट ने इस निर्णय में 12 नवंबर को जस्टिस जीएस अहलूवालिया द्वारा दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम और हिंदू समुदाय के बीच विवाह को धार्मिक संहिताओं के तहत अनुमति नहीं दी जा सकती और यह विवाह विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 के अनुसार मान्य नहीं है। इस हेतु दोनों को एक ही धर्म का होना आवश्यक है, ऐसे में यह विवाह वैधानिक तौर पर मान्य नहीं है।

एकल पीठ ने क्या फैसला दिया था? :

एकल पीठ में दोनों की सुरक्षा के को देखते हुये युवती को 11 नवंबर तक जबलपुर के शास्त्री ब्रिज स्थित राजकुमारी बाई बाल निकेतन भेजने का आदेश दिया था और हसनैन को भी किसी अज्ञात स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए थे, ताकि किसी तरह से उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके। कोर्ट ने यह भी कहा था कि 12 नवंबर तक दोनों आपस में किसी तरह का कोई संपर्क नहीं करेंगे। हसनैन अंसारी और इंदौर की अंकिता राठौर 12 नवंबर को शादी करने वाले थे, लेकिन कोर्ट ने अब रोक लगा दी है। 

याचिकाकर्ताओं की क्या दलील है? :

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मामले में याचिकाकर्ता, इंदौर निवासी युवती और सिहोरा निवासी हसनैन अंसारी, ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए यह याचिका दायर की थी। युवती और हसनैन के अधिवक्ता अशोक लालवानी ने कोर्ट में बताया कि दोनों पिछले चार वर्षों से प्रेम संबंध में हैं और एक साल से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे हैं, उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए जबलपुर कलेक्टर कार्यालय में आवेदन किया था, जिसके बाद दोनों परिजनों तथा धार्मिक संगठनों के लोगों विरोध का सामना कर रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, जिसके मद्देनजर कोर्ट से सुरक्षा का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है, जिसमें दोनों पक्षों को अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इनको लेकर काफी दिनों तक बवाल मचा रहा था, अब विशेष अधिनियम के तहत क्या फैसला आयेगा , यह अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

इसलिये हैं विरोध और आरोप? :

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इस मामले में युवती के परिजनों ने विशेष विवाह अधिनियम का हवाला देते हुए इस विवाह का विरोध किया है और इसे उनकी धार्मिक आस्थाओं के खिलाफ बताया। युवती के भाई ने आरोप लगाया कि उनकी बहन लव जिहाद का शिकार हो रही है और दावा किया है कि इस रिश्ते में वह किसी दबाव में आकर जुड़ी है। इस विरोध के बीच, युवती के भाई ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। उस मामले पर भी जांच होने की बात सामने आई है। कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षकारों को नोटिस जारी 12 नवंबर को होने वाली शादी स्थगित करने के आदेश दिए हैं।