नेपीडा (बर्मा/म्यांमार) : म्यांमार में अराकान आर्मी ने रोहिंग्या मुसलमानों का जीना दूभर कर दिया है, म्यांमार में बीते कुछ समय में विद्रोही गुट अराकान आर्मी (AA) का प्रभाव काफी बढ़ा है। म्यामांर के रखाइन राज्य को AA ने जुंटा सेना से छीन लिया गया है। इससे स्थानीय रोहिंग्या मुस्लिमों का भविष्य अनिश्चित हो गया है, इन पर बड़ी मुसीबत आन पड़ी है, जबकि पहले ही कई रोहिंग्या म्यांमार छोड़ चुके है। अराकान आर्मी का बांग्लादेश के साथ म्यांमार की 270 किलोमीटर लंबी सीमा पर भी नियंत्रण मजबूत हो गया है। इससे अब बांग्लादेश के साथ अराकान आर्मी बातचीत की स्थिति में पहुंच बन गई है। वहीं म्यांमार से बड़ी संख्या में सीमा पार करके रोहिंग्या मुसलमान भी बांग्लादेश में पहुंच रहे हैं।
सामने ऐया ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, अराकान आर्मी का रोहिंग्या समुदाय के साथ उसका रिश्ता तनावपूर्ण बना हुआ है। पहले से हाशिये पर धकेले गए रोहिंग्या समुदाय के लोगों के लिए अराकान आर्मी का उदय नई अनिश्चितता लेकर आया है। रखाइन पहले से ही म्यांमार के जटिल राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य का केंद्र बिंदु रहा है। अराकान आर्मी के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरने से स्थिति और जटिल हो गई है। म्यांमार में आब अराकान आर्मी का दबदबा है। अराकान आर्मी की गतिविधि रोहिंग्याओं और बांग्लादेश के खिलाफ है।
अराकान आर्मी के निशाने पर रोहिंग्या :
रोहिंग्या मुसलमानों के लिए अराकान आर्मी का रुख अच्छा नहीं रहा है। हालांकि अराकान आर्मी खुलेतौर पर रोहिंग्या को निशाना नहीं बनाता है लेकिन इसने ऐतिहासिक रूप से उनके प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की है, जो रखाइन राज्य में व्यापक तनावों को दर्शाता है। ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जो बताती हैं कि रोहिंग्या मुस्लिमों के घरों पर हमले किए गए हैं। इसने रोहिंग्या के पलायन को बढ़ावा दिया है। रोहिंग्या मुसलमानों से म्यांमार काफी पीड़ित रहा है, अब इसके खिलाफ बड़ा मोर्चा अराकान आर्मी ने खोल दिया है।
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बांग्लादेश में रोहिंग्या 1978 से जा रहे हैं लेकिन हालिया घटनाक्रम से ये संख्या बढ़ी है। बांग्लादेश ने हमेशा म्यांमार शासन के साथ बातचीत के जरिए रोहिंग्या को वापस भेजने की सख्त नीति अपनाई है। बांग्लादेश के भीतर वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता और रखाइन में अराकान आर्मी के कब्जे ने चीजें उसके लिए मुश्किल कर दी हैं। म्यांमार में रोहिंग्या सैन्य शासन और अराकान आर्मी के बीच फंसे हैं तो बांग्लादेश भी उन्हें लंबे समय शरण देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में ना सिर्फ रोहिंग्या बल्कि इस पूरे क्षेत्र का भविष्य एक नाजुक मोड़ पर दिख रहा है। इसकी सबसे ज्यादा मार रोहिंग्या झेल रहे हैं। ये समुदाय अभी भी म्यांमार में अपने लिए एक सुरक्षित जगह की तलाश में है, जो कि रोहिंग्या के लिये अब काफी मुश्किल है।



