20 दिनों से मुर्दाघर में रखा है पादरी का शव, मामला सुप्रीम कोर्ट में, कोर्ट ने कहा….।

बस्तर : धर्मान्तरण का दंश लगातार लोगों को भुगतना पड़ रहा है, कई लोग हिन्दू धर्म से मतांतरित होकर इसाई धर्म अपना रहे है, ऐसे में अब उन्हें मृत्यु उपरांत संस्कारों के लिये मुसीबत झेलनी पड़ रही है, हालाँकि पहले मतांतरित व्यक्ति के साथ ऐसी घटना नहीं होती थी, लेकिन अब हिन्दू वर्ग भी जागरूक हो गया है, उनका कहना है कि जब संबंधित व्यक्ति मतांतरित हो गया है तो ऐसे में उसे उसी धर्म से संबंधित क्रिया का पालन करना चाहिये और उसी के श्मशान में दफनाना चाहिये, वहीँ अब जो मामला सामने आया है वह भी चौंकाने वाला है, बस्तर के छिंदवाड़ा गांव में ईसाई पादरी सुभाष बघेल के शव को दफनाने को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया कि शव को गांव के हिंदू श्मशान की बजाय ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया जाये।

7 जनवरी को हुआ था पादरी का निधन :

यह मामला तब शुरू हुआ जब 7 जनवरी को पादरी का निधन हुआ था और ग्राम सभा ने हिंदू श्मशान घाट में शव दफनाने का विरोध किया गया था। मामले को पहले हाईकोर्ट में पेश किया गया, जहां से शव को ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने का आदेश दिया गया था। वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट ने भी ये फैसला बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती :

वहीँ इसके खिलाफ मृतक के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए ग्राम पंचायत के पक्ष में आदेश दिया है। कोर्ट ने अंतिम संस्कार में हो रही देरी को गलत ठहराया और तुरंत शव को ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता कौस्तुभ शुक्ला ने ग्राम पंचायत की ओर से पैरवी की। यह फैसला आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई समुदाय के शव दफनाने को लेकर होने वाले विवादों में नजीर बनेगा। राज्य सरकार को भी इस विवाद से राहत मिली है। वहीँ अब इसके बाद ऐसे विवादों का समझो स्थायी हल कोर्ट के जरिये मिल गया है? वहीँ आपको बता दें कि राज्य में मतान्तरण काफी तेज गति से हो रहा है।

महामृत्युंजय मन्त्र  उत्पत्ति की कथा और महत्व के साथ :  https://www.youtube.com/watch?v=L0RW9wbV1fA