दिल्ली धमाके के बाद से मुस्लिम समुदाय के प्रति बढ़ा संदेह, सामने आई ये घटना….।

नई दिल्ली : लम्बे समय बाद दिल्ली में हुये बम धमाके ने देश को दहला दिया है। लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के बाद भारत में सार्वजनिक जगहों, ट्रेनों और बसों में दाढ़ी और टोपी पहनने वाले मुसलमानों को अब शक की निगाह से देखा जा रहा है, इस बात का अंदाज़ा हाल ही में सामने आये एक मामले से लग सकता है। यहाँ एक फेसबुक प्रयोगकर्ता असद अशरफ ने अपनी आंखों से देखे अनुभव का जिक्र किया है कि कैसे एक मुसलमान को उसकी दाढ़ी और टोपी की वजह से वंदे भारत में गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ा। जिससे उसे शर्मिंदगी महसूस हुई।

अरशद ने क्या लिखा?

एक खबर के मुताबिक, अरशद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट लिखा है कि वह वंदे भारत में यात्रा कर रहे थे और दाढ़ी और टोपी पहने एक व्यक्ति उसी स्टेशन से उनके कोच में चढ़ा, जहां से उन्होंने ट्रेन पकड़नी थी और दोनों दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। इस घटना के बारे में अशरफ ने आगे लिखा कि यात्री के पास भौतिक तौर पर पहचान पत्र नहीं था, इसलिए जब टीटीई ने पहचान मांगी, तो उसने अपने फोन पर डिजिटल आईडी दिखाई। जिसके बाद ऐसा लगा कि सब कुछ ठीक है, लेकिन थोड़ी देर बाद, एक महिला सिर्फ उस आदमी के पहनावे की वजह से असहज हो गईं थी। वो अचानक घबरा गई।

महिला ने पुलिस को किया कॉल :

महिला की परेशानी तब चिंता में बदल गई और उन्होंने मुस्लिम व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए पुलिस को बुला लिया था। जिसको लेकर असद अशरफ़ आगे लिखते हैं कि अधिकारी यात्री के साथ शिष्टाचार से पेश आए। उन्होंने उसकी डिजिटल आईडी जांची और सब कुछ सही पाया गया और यात्री को अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी। लेकिन इस घटना ने असद को शर्मिंदा कर दिया।

महिला फिर भी नहीं हुईं संतुष्ट :

लेकिन इसके बावजूद वह महिला तब भी संतुष्ट नहीं हुईं। आधे घंटे बाद, उन्होंने फिर से पुलिस को भी बुलाया, इस बार मुस्लिम यात्री से उसके बैग की जांच करने को कहा गया। यात्री ने चुपचाप सबके सामने बैग खोला और बहुत ही विनम्र लेकिन थके हुए लहजे में पुलिस अधिकारियों से बैग की जांच करने को कहा। यात्री ने बताया कि उसमें सिर्फ़ कपड़े और एक किताब है और कुछ नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उसके बैग की अच्छी तरह से तलाशी ली गई। जिसके बाद पुलिस पूरी तरह से संतुष्ट हो गई।

उन्होंने लिखा कि वंदे भारत में सफ़र करते हुए, एक निर्दोष शख्स को बार-बार बिना किसी दिखावे के अपनी बेगुनाही साबित करते देखकर उन्हें फिर से याद आया कि भारत में मुसलमान होने की यही रोज़ाना की यही क़ीमत है। हालाँकि अच्छे लोग भी होते हैं, जैसा कि उनके बगल में बैठे एक अंकल ने कहा कि ऐसे लोगों की वजह से ही देश परेशान है, जिनके कारण धमाके हो रहे है। ऐसे में आम आदमी तो अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित होगा ही।

ये चीजें हमारे लिए हैं नॉर्मल :

वहीँ असद अशरफ़ आगे कहते हैं कि जब वे निज़ामुद्दीन स्टेशन पर उतरे, तो वे उस मुस्लिम व्यक्ति के पास गए और पूछा कि क्या उसे किसी मदद की ज़रूरत है या उसे घटना की सूचना देनी चाहिए, लेकिन उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये चीज़ें हमारे लिए नॉर्मल हैं। हालाँकि उन्होंने इस घटना को सार्वजनिक तौर पर शेयर किया है। वहीँ पहले जब देश में मुंबई 26/11 के हमले हुये थे तो उस समय भी मुसलमानों के लिये ऐसे ही मुसीबत खड़ी हो गई थी, उस समय की अपेक्षा वर्तमान में आतंकी हमलों में काफी गिरावट आई है।