रायपुर/जगदलपुर : 31 मार्च की डेडलाईन नजदीक है और जल्द ही समस्त नक्सल समस्या को तेज गति से समाप्त किया जा रहा है, ऐसे में जहाँ सालभर में बड़े नक्सलियों के मारे जाने के बाद अब तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ही संगठन का बड़ा नेता बच गया था। रविवार को उसने भी अपने 18 साथियों के साथ तेलंगाना के मुलुगु जिले में आत्मसमर्पण कर दिया है। देवजी के साथ आत्मसमर्पण करने वाले कमांडर स्तर के नक्सली बताये जा रहे हैं।
इनमें से कुछ के नाम सुरक्षा बलों ने फिलहाल सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किए हैं। देशभर से नक्सल खात्मे को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से दी गई 31 मार्च की डेडलाइन से 37 दिन पहले हुए इस आत्मसमर्पण को पूरे संगठन की रीढ़ टूटने की तरह देखा जा रहा है। नक्सली नेता देवजी पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम भी था। इसके अलावा अलग-अलग वारदातों में 130 से ज्यादा जवानों की हत्या में भी हाथ था।
सुरक्षा एजेंसियां इस आत्मसमर्पण को नक्सल मुक्ति की दिशा में पिछले कुछ सालों की बड़ी सफलताओं में से एक मान रहीं हैं। पुलिस अफसरों के मुताबिक यह आत्मसमर्पण मुलुगु जिले में स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (एसआईबी) और जिला पुलिस की मौजूदगी में हुआ। देवजी संगठन की सेंट्रल कमेटी से जुड़ा वरिष्ठ कमांडर रहा है। उस पर कई राज्यों में सक्रिय रहने के आरोप हैं। बताते हैं कि उस पर करोड़ों रुपए का इनाम भी था। पुलिस का दावा है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे। ये सभी दक्षिण बस्तर और तेलंगाना बॉर्डर एरिया में सक्रिय थे।
अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में चलाए गए ऑपरेशन जिनमें जंगल इलाकों में लगातार कॉम्बिंग, ड्रोन सर्विलांस और स्थानीय खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल शामिल था का असर साफ दिख रहा है। जवानों ने नक्सलियों की सप्लाई लाइन और मूवमेंट कॉरिडोर पर लगातार दबाव बनाया गया था। नतीजतन, कई कैडर आत्मसमर्पण की राह चुनने को मजबूर हुए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य दोहरा चुके हैं। तेलंगाना में यह कार्रवाई उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्षों में नक्सल प्रभाव वाले जिलों की संख्या में लगातार कमी आई है। बड़ी संख्या में उग्रवादी या तो मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा कार्यवाही के साथ-साथ सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार ने भी नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया है। फिलहाल देश में अब सिर्फ 10 जिले ही नक्सल प्रभावित वाले बचे हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां देवजी और संग्राम से मिली सूचनाओं का विश्लेषण कर रही हैं।



